हर रह गुज़र में था साथ वो
1977 में मुझे गंगोलीहाट से पढ़ाई के लिए नैनीताल लाया गया। ददा व भाभी कभी घर से बाहर जाते तो गिरदा को हमारी जिम्मेदारी सौंप जाते। वह हमारे संरक्षक का दायित्व निभाता। उसी साल वन आन्दोलन में गिरदा, ददा, राजीव दा व अन्य साथियों के साथ हुड़के की थाप पर ‘‘आज हिमाल तुमन कैं धत्यूछौ, [...]
‘हमने युवा पीढ़ी को क्या दिया’
देहांत से डेढ़ हफ्ते पहले तो गिरदा का फोन आया था, मेरे स्वास्थ्य के हाल-समाचार पूछने। मैं एम्स में भर्ती था। ’’त्रेपन कैसी है बब्बा तबियत ?’’ मुझे मेरी बीमारी के बीच लगातार ढाँढस बँधाते रहे कि तुझे कुछ नहीं होगा, हम जल्दी मिलेंगे और खुद ही चले गये। मैं इतना भाग्यशाली भी तो नहीं [...]
नगाड़े खामोश हैं और हुड़का भी……
रामनगर में इंटरनेशनल पायनियर्स द्वारा आयोजित पहली अखिल भारतीय नाटक प्रतियोगिता(1977) के दौरान गिरीश तिवाड़ी से पहली बार मिला था। तब वह युगमंच, नैनीताल की प्रस्तुति ‘अंधेर नगरी’ लेकर आया था। गिरदा के अलावा यह रंगकर्म की दुनिया से भी मेरी पहली नज़दीकी मुलाक़ात थी। नाटकों को पढ़ भर लेने से इतर किसी नाट्यदल को [...]
जमींदोज हो सकता है कफनौल
पिछले दिनो हुई भयंकर बरसात से विकासनगर से लेकर यमनोत्री तक लोग जगह-जगह रास्तो में फँसे रहे। कई गाँवों में तो अब तक देश दुनिया से कटे हुए हैं। यमुना घाटी के अति दुर्गम गाँव कफनौल में हुए भूस्खलन ने दो दर्जन से भी अधिक परिवारों के आशियाने लील लिए हैं। फिलहाल ये परिवार खुले [...]
नैनीताल में ‘मैकबेथ’ का मंचन
मदन मेहरा लेडी मैकबेथ की सर्वशक्तिमान बनने की भूख मैकबेथ को एक के बाद एक कत्ल करने को उकसाती है और महत्वाकांक्षा के जाल में फँसा मैकबेथ अपनी ही करनी की परछाई से घिरता चला जाता है। नियति यही है कि न कुछ लेकर आये थे, न कुछ लेकर जायेंगे। मैकबेथ भी मारा जाता है। [...]
लेखकों की गोष्ठी सम्पन्न
विभिन्न भाषाओं के लेखकों, कवियों और समालोचकों के प्रतिष्ठित संगठन इंडियन सोसायटी ऑफ ऑथर्स के रजत जयंती समारोह भारत के विभिन्न राज्यों में आयोजित किए जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में नैनीताल में नैनीताल क्लब के सभागार में भी एक समारोह आयोजित किया गया। 24 अक्टूबर से 26 अक्टूबर तक चले समारोह के विभिन्न सत्रों [...]
युवाओं ने जीवित रखा गैरसैंण का मुद्दा
इस पखवाड़े उत्तराखंड राज्य के गठन को दस साल पूरे हो जायेंगे। एक दशक के इस सफर में कई बुनियादी और बड़े सवाल पीछे छूट गये हैं जिनका हल खोजा जाना अभी बाकी है। इन्हीं में से एक सवाल उत्तराखंड की असली राजधानी का भी है। पृथक राज्य की लड़ाई के साथ ही आंदोलनकारियों ने [...]
अपनी सहृदयता से तादात्म्य स्थापित करते थे भैया जी
देवीदत्त सांगुड़ी 23 अगस्त को प्रताप भैया के देहान्त के बाद अनेक यादें ताजा होने लगीं। पचासवें दशक की बात है। प्रताप भैया लखनऊ यूनिवर्सिटी में जाते और मैं नैनीताल में पढ़ता था। तभी उनसे परिचय हुआ। उन दिनों लखनऊ यूनिवर्सिटी में एक छात्र आंदोलन हुआ, जिसने हिंसक रूप ले लिया। गिरफ्तारियाँ र्हुइं। प्रताप भैय्या [...]
बदरीनाथ राजमार्ग अभी भी अवरुद्ध
कुछ दिन पहले सब्ज़ी लेने गया तो पाया कि सेम (जिसे यहाँ छीमी कहते हैं) एक सौ रुपए किलो बिक रही थी। कोई भी सब्ज़ी पचास रुपए किलो से कम नहीं थी. सब सब्जियाँ यहाँ दूर, नज़ीबाबाद तथा अन्य मैदानी भागों से आती हैं। अधिक वर्षा के कारण हरिद्वार से आनेवाला राजमार्ग सितंबर माह से [...]

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