प्रस्तुति : प्रमोद तिवारी
‘बाल प्रहरी’ द्वारा 19, 20 एवं 21 जून, 2010 को ‘सिद्ध’ संस्था के साथ मिलकर पाँचवी राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी का आयोजन मसूरी में किया गया। इसमें उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमांचल प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक आदि राज्यों के 130 प्रमुख साहित्यकारों ने सहभागिता की। संगोष्ठी का प्रारम्भ बच्चों की काव्य गोष्ठी से हुआ, जिसकी अध्यक्षता एवं संचालन भी बच्चों ने किया। 20 जून की सायं आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में 72 कवियों ने कविताएँ पढ़ीं।
’बालसाहित्य एवं इलैक्ट्रानिक मीडिया’ विषय पर वक्ताओं की चिंता थी कि विज्ञान के आज के युग में भी इलैक्ट्रानिक मीडिया बच्चों के लिए भूत-प्रेत एवं जादू-टोने पर आधारित अवैज्ञानिक एवं अतार्किक सामग्री परोस रहा है। हालाँकि इलैक्ट्रानिक मीडिया से बच्चे का शब्द भण्डार बढ़ रहा है और उसे कई जानकारियाँ समय से प्राप्त हो रही हैं।
संगोष्ठी में बड़े लोगों द्वारा लिखे जा रहे बाल साहित्य की समीक्षा बच्चों द्वारा की गई। बालसाहित्य के सशक्त हस्ताक्षर डॉ. प्रत्यूश गुलेरी व कृष्ण शलभ के साथ ही कई नवोदित कवियों ने अपनी बाल कविताएं पढ़ीं। सत्र में उपस्थित बच्चों ने बड़ों द्वारा लिखी गई कविताओं पर गेयता, कठिन शब्द, प्रस्तुतीकरण, भाव, संदेश व तुकबंदी को लेकर कई सवाल खड़े किए। बाल साहित्यकारों को आत्मचिंतन के लिए यह सत्र काफी उपयोगी रहा।
अंत में देश के 10 चुनिंदा साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। यह निर्णय लिया गया कि अल्मोड़ा में बालसाहित्य केन्द्र की स्थापना की जायेगी। इसके लिए समस्त बाल साहित्यकारों से अपना साहित्य उपलब्ध कराने का आह्वान किया गया। बाल साहित्य के उन्नयन एवं इलैक्ट्रॉनिक मीडिया में बच्चों के लिए तर्कसंगत सामग्री देने आदि के लिए एक हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन भारत सरकार एवं पा्रंतीय सरकारों को भेजने के लिए तैयार किया गया।
























आपकी टिप्पणीयाँ