हफ्तों के बाद खिली धूप के बावजूद मैं कुढ़ा हुआ था। लम्बी बरसात की सीलन मेरे शरीर में ही नहीं, दिमाग में भी घुस चुकी थी।
‘‘अंकल, मिठाई लीजिये,’’ उसकी आवाज ने ही मेरी तंद्रा भंग की। वह एक नवयुवक था और उसके हाथ में मिठाई का लिफाफा था।
‘‘मिठाई! ….किस बात की ?’’ मैंने याद करने की कोशिश की…. आज तो मंगल भी नहीं था। कभी-कभी बजरंगबली के चाहने वाले इसी तरह प्रसाद खिला देते हैं….. अजनबी होते हुए भी।
‘‘आपको मालूम नहीं कि अमरनाथ श्राइन बोर्ड को जमीन मिल गई है। सरकार को झुकना पड़ा। आज विजय दिवस मनाया जा रहा है।’’
‘‘हाँ…..और कश्मीर हाथ से निकल गया है…..।’’ बेसाख्ता मेरे मुँह से निकला। मुझे सिर्फ चुप रह कर मिठाई ले लेनी चाहिये थी……मगर अब चारा क्या था ?
‘‘क्या मतलब ?’’ नौजवान चौंका। उसकी आँखों में गुस्सा झाँकने लगा।.. .. मुझे लगा कि इस नवयुवक को कहीं देखा है…..कहाँ….एकाएक याद नहीं आया।
‘‘अखबार नहीं पढ़ते क्या ? करते क्या हो तुम ?’’
‘‘पोलिटिकल साइंस में रिसर्च कर रहा हूँ। लेकिन आपको इससे क्या लेना-देना ? कश्मीर के बारे में क्या कह रहे थे आप ?’’
‘‘वही तो पूछ रहा हूँ। अखबार नहीं पढ़ते क्या ?’’ ‘‘पढ़ता क्यों नहीं।’’
‘‘अमर उजाला और जागरण पढ़ते होगे।’’
‘‘तो और क्या पढ़ूँ ?’’ वह गुर्राया। अब याद आया…… उस दिन जब अमरनाथ श्राइन बोर्ड की जमीन को लेकर विश्व हिन्दू परिषद् और भाजपा का चक्काजाम हो रहा था, यह युवक भी नारे लगा रहा था, ‘जिस हिन्दू का खून न खौला खून नहीं वह पानी है’। दिमाग की कुढ़न एकाएक गुस्से में बदल गई।
‘‘वही तो! ढंग की चीज पढ़ने वाले होते तो मालूम होता कि जैसे-जैसे जम्मू में अमरनाथ की जमीन का आन्दोलन तेज हुआ……कश्मीर में भी आजादी की लड़ाई तेज हो गई। कश्मीर हिन्दुस्तान के हाथ से निकल रहा है। मालूम है तुम्हें ? मालूम होता तो मिठाई बाँटने की नहीं सूझती। मेरी तरह तुम भी मातम मना रहे होते।’’
‘‘ऐसा कैसे हो सकता है ? कश्मीर हमसे अलग कैसे हो सकता है ?’’ ‘‘हाँ, मैंने भी तुम्हारे नारे सुने ह ‘दूध माँगोगे खीर देंगे, कश्मीर माँगोगे चीर देंगे’। लेकिन नारे लगाने से असलियत नहीं छिपती। उत्तराखंड आन्दोलन की याद है तुम्हें ?’’
‘‘हाँ, थोड़ी-थोड़ी।’’
‘‘तब तो यह भी याद होगा कि पहाड़ के छोटे-छोटे कस्बों में कितने बड़े-बड़े जलूस निकलते थे उन दिनों. …..हजारों के जलूस। लेकिन कश्मीर में उससे भी बड़े जलूस निकल रहे हैं आजकल। तीन-तीन लाख लोगों के जलूस। गाँवों से लोग आते हैं गाड़ियों में ठसाठस भर कर। पुलिस और फौज बेबस है। गिने-चुने लोग होते तो कुछ को आतंकवादी बता कर एनकाउण्टर कर देती। बाकी लोग डर कर घरों में छिप जाते। लेकिन लाखों की भीड़, जिसमें औरतें भी हों और बच्चे भी….. क्या कर सकती है पुलिस ?’’
‘‘क्यों नहीं कर सकती ?’’ ‘‘उत्तराखंड आन्दोलन में क्या कर सकी पुलिस ? इसलिये नहीं कर सकती क्योंकि यह पूरी तरह अहिंसक आन्दोलन है। 15 अगस्त के बाद पूरे श्रीनगर में पाकिस्तान के झंडे लग गये हैं….हर घर में …..हर दुकान में। लाल चौक पर….डल गेट….बूलेवार्ड और टी. आर.सी. पर। पेड़ों पर और खम्भों पर। कश्मीर में मौजूद पाँच लाख पुलिस और फौज को उतने झंडे ही उतारने में हफ्तों लग जायेंगे। जब भावनायें इतनी ऊपर चली गई हों तो सिर्फ बन्दूक के बल पर कब तक रोका जा सकता है कश्मीर को आजाद होने से। और यह सब तुम जैसे लोगों के कारण हुआ…. तुम्हारे और तुम्हारे नेताओं के कारण…. जो धर्म के नाम पर उन्माद पैदा कर वोटों का जुगाड़ करते हैं। कभी गुजरात में हिन्दुओं को मारते हैं….कभी उड़ीसा में इसाइयों को। कभी मुम्बई से उत्तर भारतीयों को खदेड़ते हैं।’’
कहते ही लगा कि यह बहुत ज्यादा हो गया…… इसका नतीजा तो भुगतना ही पड़ेगा।
‘‘बुड्ढे तू देश का दुश्मन है, देख लूँगा तुझे,’’ वह चिल्लाया और इधर-उधर कुछ तलाश करने लगा। मुझे लग गया कि अपने साथियों को ढूँढ रहा है…अब वह उन्हें मोबाइल से बात कर बुलायेगा। यह गनीमत थी कि ऐसे लोग…..दंगाई किस्म के….. भीड़ बना कर ही हमला करते हैं……अकेले में बेहद डरपोक और कायर होते हैं। मैं बहुत तेजी से वहाँ से खिसक लिया।
अब भी डरा हुआ हूँ कि वह युवक कहीं मिल जायेगा तो मेरा क्या हश्र होगा। सिर्फ इन्तजार ही कर सकता हूँ कि वह भूल जाये…..उसका गुस्सा उतर जाये। पुलिस से मदद माँगना तो फिजूल है। पुलिस तो उसके और उसके साथियों की ही हौसलाअफजाई करेगी।
the writer of above article perhaps trying to say that aggresive postures of ABVP/SHIIV SENA like hardliner HINDU parties has alienated Kashmiri people. Sir, i am a firm believer of theory that religion does not made a person good or bad. in every religion, we can find good or bad persons but somehow i could not understand the reason behind Kashmir unrest. Why is it that out of all states of india, Kashmiri people has never accepted them to be INDIAN. THE ONLY REASON THAT I CAN UNDERSTAND IS THAT THIS WAS THE ONLY STATE WHERE MUSLIM POPULATION WAS IN MAJORITY HAVING DIRECT SUPPORT FROM THEIR MUSLIM BROTHERS ACROSS THE BORDER AND THIS PROVES THAT WHERE EVER THEY ARE IN MAJORITY, MUSLIMS WOULD NEVER ACCEPT BEING GOVERNED BY A POLITICAL SYSTEM WHICH IS TO BE RUN ON THE WILL OF A RELIGION OTHER THAN ISLAM. THEIR OPPOSITION TO INDIA COULD HAVE BEEN EXPLAINABLE HAD THE SOCIO AND ECONOMIC CONDITION OF PAKISTAN BETTER THAN INDIA OR INDIA WOULD HAVE BEEN A STATE WHERE PRACTISING ISLAMIC RELIGION IS NOT WELCOME. TRUE THERE ARE BABRI MASJID, GODHRA, BHIVANDI ETC. IN INDIA. BUT ISN’T IT A FACT THAT IN A COUNTRY HAVING 80%OF HINDU POPULATION, RIGHT WING HINDU PARTY BJP COULD RULE ONLY ONE LOK SABHA TERM IN THE HISTORY OF INDIAN REPUBLIC. NARENDRA MODI HAS BEEN STATED BY MEDIA TO BE A MUSLIM BAITER BY THE MEDIA BUT THE SAME MEDIA HAS ALSO SHOWN HIM TO BE A GOOD ADMINISTRATOR . IT IS HIS GOOD ADMINISTRATION , THAT IS WHY NARENDRA MODI HAS BEEN RESELECTED BY THE SAME ELECTORATE WHICH HAS OUSTED BJP IN LOK SABHA ELECTIONS. . THEN WHAT IS THE REASON BEHIND KASHMIRI PEOPLE SUPPORTING PAKISTAN.
PLEASE ENLIGHTEN ME IF U CAN FIND ANY OTHER REASON OF UNREST IN KASHMIR