राजनीति में भी क्या-क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं…चोरी…डकैती..झूठ..सच…। अगर किसी अन्य के किये गये काम को हथियाया जा सके तो क्या कहने ?
नयना ज्योति समिति स्वास्थ्य के क्षेत्र में दस वर्ष से काम करने वाली नैनीताल नगर की एक प्रमुख संस्था है, जो मुख्य रूप से नेत्र सम्बन्धी ओपीडी तथा मोतियाबिन्द के ऑपरेशन करने के लिये लोकप्रिय है। यह समिति एन.जी.ओ. की परिभाषा में भी नहीं आती, क्योंकि यह किसी तरह की सरकारी या सांस्थानिक फंडिंग पर निर्भर नहीं है और नैनीताल नगर के कुछ सचेत नागरिकों का सम्मिलित प्रयास है। नैनीताल में जन्मे प्रख्यात नेत्र चिकित्सक डॉ. विनोद तिवारी के अब तक के एक दर्जन शिविरों में इस संस्था ने लगभग 1400 ऑपरेशन किये तथा पन्द्रह हजार से ज्यादा रोगियों की जाँच कर उनकी चिकित्सा की है। कई तो अद्भुत और असम्भव किस्म के केस भी इन शिविरों से निकल कर आये, जिनमें जन्मांध बच्चों को दृष्टि देना तथा एक रोगी की 23 वर्ष के बाद नेत्र ज्योति वापस लाने के प्रकरण विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। सर गंगाराम अस्पताल के डॉ. सुनील जैन के सहयोग से कई किस्म के विशेषज्ञ डॉक्टरों को लेकर जनरल शिविर लगाना, साइकेट्रिस्ट डॉ. अनीता महाजन के मानसिक स्वास्थ्य शिविर लगाना तथा बी.सी.रॉय पुरस्कार से सम्मानित पद्मश्री डॉ. एम.सी.पंत के कैंसर जागरूकता शिविर लगाना नयना ज्योति समिति की अन्य गतिविधियाँ रही हैं। विगत कुछ वर्षों में संस्था ने नैनीताल में एक्यूप्रेशर के केन्द्र चलाकर कई लाइलाज मर्जों से रोगियों को राहत दी है।
संस्था ने सीमित संसाधनों के बावजूद समान सोच के सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों के साथ मिल कर नैनीताल से बाहर अल्मोड़ा, गंगोलीहाट, सोमेश्वर, भवाली, पदमपुरी, ओखलकांडा, खैरना, बेतालघाट आदि स्थानों पर भी अपनी गतिविधियाँ चलाई हैं। इसी क्रम में 22 जुलाई को नयना ज्योति समिति ने महिला समाख्या के साथ मिल कर रामगढ़ ब्लॉक के नथुवाखान में डॉ. विनोद तिवारी की ओ.पी.डी. करवाई। महिला समाख्या भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय के अन्तर्गत महिला सशक्तीकरण के लिये काम करने की एक परियोजना है, जो सरकारी अनुदान पर चलने के बावजूद बेहद महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। विशेषकर नैनीताल जनपद में विगत वर्ष हुई अतिवृष्टि के दौर में इस संस्था ने अध्ययन और राहत का सराहनीय कार्य किया। महिला समाख्या ने जगह-जगह ‘महिला जागृति महासंघ’ बनाये हैं, जो विपरीत स्थितियों में और कई तरह के खतरे उठा कर भी अपना काम करते हैं। भूमाफियाओं के वर्चस्व वाले रामगढ़ ब्लॉक में ‘महिला जागृति महासंघ’ ने सरकार-प्रशासन को अपनी जेब में रखने वाले क्षेत्र के सबसे बड़े भूमाफिया के आतंक को तोड़ा। क्षेत्र में सक्रिय तस्करों से लोहा लेना, उनको रंगे हाथों पकड़ाना और फिर फर्जी मुकदमे झेलना ‘महिला जागृति महासंघ’ की खासियतों में शुमार है।
22 जुलाई को नथुवाखान में होने वाली ओ.पी.डी. के लिये महिला समाख्या ने आसपास के गाँवों में डट कर प्रचार किया था, ताकि उन निर्धन ग्रामीणों को लाभ मिल सके, जिनके लिये इतने ऊँचे स्तर की चिकित्सा सुविधा कल्पनातीत है। शिविर में भीड़भाड़ भी काफी रही। तीन सौ के लगभग रोगियों की आँखों की जाँच की गई, 75 से अधिक रोगियों को चश्मे दिये गये तथा 19 रोगियों में अल्मोड़ा ले जाकर उनके मोतियाबिन्द के ऑपरेशन करवाये गये।
…..दो दिन बाद 24 जुलाई के ‘अमर उजाला’ में एक समाचार छपा…‘रीठा पोखरी गाँव में एक नेत्र चिकित्सा शिविर’ हुआ, जिसका उद्घाटन ब्लॉक प्रमुख दान सिंह भंडारी ने किया….करवाने वाले संजय कर्नाटक, चन्द्रप्रकाश जोशी आदि-आदि थे।’…वाह! अब यह संजय कर्नाटक कौन हैं ? ये अपनी गाड़ी में बोर्ड टाँग कर घूमने वाले भाजपा के सैकड़ों छुटभैये नेताओं में से एक हैं। अब यह बताये जाने की तो जरूरत नहीं होनी चाहिये कि ये बोर्ड क्यों टाँगे जाते हैं और इनकी आड़ में क्या-क्या किया जाता है। और जब नेतागिरी करनी ही है तो तमाम काले कामों के साथ कुछ उजियारे काम भी छीन-झपट कर अपनी झोली में क्यों न डाल लिये जायें चाहे उसके लिये अपनी पार्टी के ब्लॉक प्रमुख के नाम का दुरुपयोग ही क्यों न करना पड़े। संजय कर्नाटक का कोई महत्व नहीं है, वह तो भाजपा जैसी पार्टियों की पैदावार हैं। भाजपा को भी क्या दोष देना, वह तो हमारी राजनीतिक संस्कृति का एक जरूरी हिस्सा है….जैसे कांग्रेस, उक्रांद, सपा, बसपा….