ट्यूबवैल तो तब चलेंगे, जब जमीन के गर्भ में पानी होगा
प्रदेश के नये मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने हल्द्वानी के अपने पहले दौरे पर क्षेत्र की पेयजल समस्या से निपटने के लिए आठ नए ट्यूबवैल देने की घोषणा की। नये मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा की गई घोषणा से भी हल्द्वानीवासी प्रसन्न हो सकते हैं। मगर दस साल पूर्व भी तत्कालीन सूचना एवं लोक निर्माण मंत्री डॉ. [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 11
हल्द्वानी अब महज व्यावसायिक नगर नहीं रहा है। पहाड़ से उतर कर जिन हजारों लोगों ने यहाँ अपना आशियाना बनाया है, उनमें अनेक मनीषी, साहित्यकार भी हैं। यह दीगर बात है कि इनमें से अधिकांश लोगों के व्यापक समाज से अलग-थलग बने रहने के कारण जन सामान्य इनके बारे में नहीं जानता। आपस में भी [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 10
व्याकरणाचार्य जय दत्त कांडपाल उच्चकोटि के संस्कृत विद्वान थे। उन्होंने कम कवितायें लिखीं, लेकिन अच्छी लिखीं। अल्मोड़ा के कंडारकुआ ग्राम में जन्मे स्व कांडपाल ने मथुरा, काशी और इलाहाबाद में संस्कृत की शिक्षा ग्रहण कर यहाँ ललित महिला विद्यालय, लक्ष्मी शिशु मंदिर व सनातन धर्म संस्कृत विद्यालय में अध्यापन किया। वे नैनीताल में भारतीय जनसंघ [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 9
रमेश चन्द्र जोशी द्वारा हल्द्वानी में ‘सुमन कला सदन’ नाम से संगीत विद्यालय की स्थापना किया जाना संगीत-कला की दृष्टि से ऐतिहासिक कदम था। जोशी जी के प्रयास से ही नवाबी रोड में ‘अरुणोदय’ संस्था का जन्म हुआ, जो महत्वपूर्ण कार्य कर रही है और अरुणोदय धर्मशाला भी विविध कार्यक्रमों का केन्द्र बन गयी है, [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 8
शहर में दो तेल की मिलें हुआ करती थीं। वर्मा जी की नैनी ऑयल मिल और साह जी की दुर्गा ऑयल मिल। काशीपुर के सेठ व्यापारी लाला व्रन्दावन का तम्बाकू का काफी फैला हुआ कारोबार था। बाद में सेठ ने कारोबार बन्द कर दिया, लेकिन ज्वालादत्त जी के पिता जी की लालमणि-खीमदेव फर्म तम्बाकू के [...]
एक विशिष्ठ परम्परा का जन सामान्य में रुपान्तरण
विकृत होते सांस्कृतिक परिवेश के बीच जब कुमाऊँ की होली परम्परा पर नजर दौड़ाते हैं, तो सुखद आश्चर्य होता है। सुखद इसलिए कि एक विशुद्ध परम्परा की गायकी ने यहाँ के लोक जीवन में स्वाभाविक रूप से प्रवेश कर लिया और आश्चर्य इसलिए कि शास्त्रीयता की जटिल परम्पराओं की निपट अनभिज्ञता के बीच जिन शास्त्रीय [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 6
खुशीराम शिल्पकार और भूमित्र आर्य को दलितों के उत्थान के लिए सदैव याद किया जाता रहेगा। 1886 में हल्द्वानी के निकटवर्ती गाँव में जन्मे खुशीराम ने जब 1894 में मिशन स्कूल हल्द्वानी में प्रवेश लिया तो उन्हें सवर्ण छात्रों द्वारा अपमानित किया गया। 1906 में दलितों को ‘शिल्पकार’ नाम देने का उन्होंने प्रयास किया और [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 5
सन् 1885 में हल्द्वानी में टाउन एक्ट लागू हुआ। 1 फरवरी 1897 को इसे म्युनिसिपैलिटी बनाया गया, किन्तु 1904 में इसे नोटीफाइड एरिया बना दिया गया। 1917 में इसे फिर म्युनिसिपैलिटी का दर्जा दिया गया। 21 दिसम्बर 1942 को काठगोदाम क्षेत्र इसमें शामिल कर हल्द्वानी-काठगोदाम नगरपालिका का गठन हुआ। 1956 में इसे द्वितीय श्रेणी का [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी – 4
बचीगौड़ धर्मशाला परिसर में बने मंदिर से लगा मटरगली की ओर एक प्याऊ था। उस समय प्याऊ लगाना और धर्मशाला बनाना परोपकार का काम माना जाता था। ऐसे ही एक समाजसेवी परिवार के व्यवसायी राजेन्द्र कुमार जैन बताते हैं कि उनके बुजुर्ग बुलन्दशहर से आकर हल्द्वानी में बसे थे। इनके दादा पूरनमल जैन 1895 के [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी- 3
गार्गी यानी गौला नदी के तट पर बसा और नहरों के जाल से घिरा हल्द्वानी इस समय पेयजल संकट से त्रस्त है। जल संकट के पीछे सही नियोजन का अभाव और विभागीय उदासीनता तो कारण हैं ही, यहाँ बस जाने की होड़ में आबादी का अंधाधुंध फैलाव भी बड़ा कारण है। आदमी चाहे पहाड़ का [...]
आपकी टिप्पणीयाँ