हमने उन्हें जासूस समझा था…
12 फरवरी, 2012 की सुबह चन्द्रशेखर तिवारी ने विद्यासागर नौटियाल के देहान्त की सूचना दी तो लगा, मानो वर्षो की कमाई जमापूँजी लुट गई हो। उस दिन भाई राजेन्द्र टोडरिया की पहल पर नव प्रजामण्डल की बैठक में बार-बार नौटियाल जी चलचित्र की तरह मन-मस्तिष्क में आते-जाते रहे। …..बात 1973 की है। पिताजी का काशीपुर [...]
वे विद्यालय को आनन्दालय बनाना जानते थे
एक प्रयोगधर्मी शिक्षक के रूप में लोकप्रिय शिव दर्शन सिंह नेगी का 12 अक्टूबर 2011 को चंडीगढ़ में लम्बी बीमारी के बाद देहान्त हो गया। वे ब्रेन ट्यूमर से पीडि़त थे। वर्ष 2004 में उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार मिला था। पौखड़ा, पौड़ी गढ़वाल में 15 नवम्बर 1945 को जन्मे नेगी जी पारिवारिक परिस्थितियों के कारण स्कूली [...]
उनके परिवार को लेकर यह चुप्पी क्यों ?
गिर्दा को परलोक गए आठ महीने से ऊपर हो गये हैं। नैनीताल समाचार के अलावा कई अन्य पत्र-पत्रिकाओं में उन पर श्रद्धांजलि लेख अभी तक पढ़ने को मिल रहे हैं। कुछ एक पत्रिकाओं में उन पर कवितायें भी छपी हैं। गौर करने वाली बात यह है कि गिर्दा से अपनी नितान्त करीबी घोषित करने वाले [...]
नैनीताल समाचार के वे अभिभावक थे
21 नवम्बर को ई.टी.वी. पर रात की खबरों को देखते हुए नीचे की पट्टी पर चन्द्रसिंह यायावर के निधन का समाचार पढ़ा तो विश्वास नहीं हुआ। मेरे लिये मेहलचौरी की सबसे बड़ी पहचान यही थी कि यहाँ चन्द्रसिंह यायावर रहते थे। उनके लेख पत्र-पत्रिकाओं के साथ ही प्रमुखता से ‘नैनीताल समाचार’, ‘युगवाणी’ और रीजनल रिर्पोटर [...]
अमर सिंह जैसे अन्वेषकों की आज भी जरूरत है
प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों का समुचित उपयोग न होने के कारण उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र आज भी औद्योगिक रूप से पिछड़े हुए हैं। कहा जाये तो एक शताब्दी पहले का समाज अधिक स्वावलम्बी था। तब संसाधनों के बेहतर उपयोग एवं नवीन खोजों के लिये चिंतन भी समाज में कई स्तरों पर होता रहता था। ऐसा [...]
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