चूर चूर हो गया है हरिराम टम्टा जी का सपना
कभी अपने चाय के बगीचे और ‘चहा खांड’ (कारखाना) के लिये भी प्रसिद्ध बेरीनाग की जनता के लिये 13 अप्रेल सन 2001, बैसाखी का दिन खासा हलचल भरा रहा। उस दिन क्षेत्र के निःस्वार्थ समाज सेवी स्व. श्री हरिराम टम्टा जी की कोशिशों से स्थापित ‘बापू वाचनालय एवं पुस्तकालय’ के शुभारम्भ की तैयारी चल रही [...]
पशुबलि प्रथा देवभूमि पर कलंक है
देवभूमि कही जाने वाली उत्तराखंड की धरती पर धर्म व आस्था के नाम पर प्रचलित पशुबलि प्रथा इसकी संस्कृति के माथे पर कलंक है। आजादी से पूर्व तथा उसके परवर्ती सामाजिक नव जागरण के दौरान ऐसी कुप्रथाओं और धार्मिक रूढ़ियों के विरुद्ध भी आवाजें उठती थीं। तब यह माना जाता था कि शिक्षा व नई [...]
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