छोटे परिवेश की बड़ी रचना के अंतर्विरोध
राजीव लोचन साह ने पहले लिखा, बाद में नवीन जोशी ने भी इसे दोहरायाकि शेरदा ‘अनपढ़’ की लोकप्रिय छवि एक हास्य कवि की बनती चली गई (बना दी गई), जो वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण था, हालाँकि अपने बाद के दिनों में खुद शेरदा अपने आप को हास्य कवि के रूप में प्रोजेक्ट करने में सम्मानित महसूस [...]
उन दिनों हमने एक समानान्तर दुनिया के सपने रचे
चौदह दिसंबर की सुबह जब राजीव लोचन साह का मोबाइल पर संदेश आया कि नंदकिशोर भगत नहीं रहे, तो मैं उसकी शक्ल याद करने लगा। इतने दिनों से उसके साथ संपर्क छूटा हुआ था कि मुझे शक्ल तलाशने में वक्त लगा। एक दुबले-पतले इंसान का भारहीन पुतला आँखों के आगे तैरने लगा, जिसे सक्रिय चेहरे [...]
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