कब शामिल होंगी गढ़वाली-कुमाउनी भाषा आठवीं अनुसूची में
गढ़वाली-कुमाउँनियों की संख्या लाखों में होते हुए भी और अब उत्तराखंड राज्य बने हुए आठ वर्ष हो चुकने के बाद भी गढ़वाली-कुमाउँनी भाषा का तिरस्कार जारी है। भाषा और संस्कृति ही हमारी अस्मिता की पहचान है, मगर उत्तराखंड राज्य सरकार को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने के प्रश्न पर मौन साधे हुए हैं। [...]
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