ग्लोबल वार्मिंग
हरदा ठीक ही ठहरा शहर जाकर तुम भी बदल गये तुम्हारे बदलते ही बदल गया समयचक्र समय से पहले पकने लगे हैं काफल और हिसालू और फसल सूखने के बाद बरसता है आसमान कुछ होता भी है तो चले आते हैं जंगली जानवर कहीं खो गयाी है फूलदेई और घुघुती फलों में बौर लगते ही [...]
कहाँ-कहाँ से चले आते हैं नैनीताल ! -2
पिछ्ले अंक से आगे….. थोड़ा सरकने के बाद गाड़ी एक बार फिर जाम में फँस जाती है। इस बार सड़क पर डामर लगाया जा रहा है। सीजन में काम होना उतना जरूरी नहीं है, जितना कि काम होते हुए दिखना। सड़कें दुरुस्त रहनी चाहिये, वरना वी.आई.पी. गाड़ियों का ‘अलाइनमेंट’ आउट हो सकता है। अगर ऐसा [...]
कहाँ-कहाँ से चले आते हैं नैनीताल !
लो सपने संजोये जिसका इंतजार था, वो सीजन आ ही गया। सीजन कभी अकेला नहीं आता, अपने साथ कई फजीहतें भी साथ लाता है। मंत्री, संत्री, भिखारी, मदारी, सीजनल पुलिस और गिरहकटों के साथ-साथ ‘एफ टीवी’ से निकले लोग भी चले आते हैं। नैनीताल वाले हमेशा दुआ माँगते हैं कि इस बार सीजन में वी.आई.पी. [...]
भ्रष्टाचार तो तरक्की का रास्ता है हजारे जी !
‘पूरे देश का कहना है अन्ना हजारे गहना है।’ ‘जब तक सूरज चांद रहेगा अन्ना तेरी बात कहेगा’, ‘अन्ना नहीं तू आंधी है, नये दौर का गांधी है।’ ये सारे नारे अन्ना हजारे के योगदान के बारे में हैं। हर कोई कमर कस कर आपके साथ जुड़ने को तैयार हैं। स्कूल भी बच्चों के हाथ [...]
कभी बाघ आदमी पर, कभी आदमी बाघ पर
‘‘सुनो-सुनो। सभी राज्यवासियों को सूचना दी जाती है कि राज्य में बाघों की संख्या बढ़ाये जाने का विधेयक पास हो गया है। बाघों को मारने पर पाबंदी लगा दी गई है। इसलिए जो भी बाघों पर अत्याचार करेगा या फिर ‘इंक्वायरी टीम’ जिसके खिलाफ भी सबूत पेश करेगी, उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। बाघ हमारा [...]
नहीं रहा रहने लायक नैनीताल शहर
’‘बड़ी पॉलिटिक्स है नैनीताल में। ये शहर अब रहने लायक नहीं रहा। मैं आज ही ये शहर छोड़कर जा रहा हूँ।’’ दयाशंकर झल्लाया हुआ कमरे में आया और अपना सामान बाँधने लगा। दयाशंकर मेरा दोस्त है। पढ़ा-लिखा बेरोजगार है, भगवान की दया से अब ‘ओवर ऐज’ भी हो गया है। थोड़ा चिड़चिड़ा है पर दिल [...]
बापू ये शहर छोड़कर कहीं मत जाना
बापू आप महान हैं। आप की महानता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि आप मेरे पैदा होने से पहले ही देश को आजाद करा गये। मैंने भी अपना कर्तव्य पूरी तरह से निभाया है। आपके जन्म दिवस पर लड्डू खाये हैं, तो शहीद दिवस पर श्रद्धांजली भी दी है। आप भारतवर्ष में जहाँ [...]
थर्टी फर्स्ट के बाद
‘‘कहो कैसा लगा नैनीताल ? कहा था न… ऐसी जगह ले जाउंगा जहाँ सकून है, तन्हाई है, मस्ती है।’’ ‘‘वाह क्या जगह है नैनीताल, मै तो हर साल यहाँ आना चाहूँगी। न आई.डी का झंझट है न ‘रेड’ का डर। हाँ, थोड़ा महंगा जरूर है, पर ‘सेफ’ है।’’ एक जनवरी की सुबह मालरोड कूड़े से [...]
नैनीताल को बचाना होगा
“ये ताल में पकौड़ी-जलेबी जैसा क्या तला जा रहा है ?” “ये पकौड़ी-जलेबी नहीं है। यह तो पानी शुद्ध किया जा रहा है। तालाब की सफाई हो रही है।” “कब तक होगी ये सफाई……?” “सफाई करने की मशीनें किराये की हैं। जब किराया देने को नहीं होगा, उसी दिन से सफाई बन्द हो जायेगी और [...]
‘विरासत’ के बहाने हबीब तनवीर को श्रद्धांजलि
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली, कुटुम्ब विकास समिति, नैनीताल एवं शारदा संघ, नैनीताल की प्रस्तुति नाटक ‘विरासत’ सही अर्थों में पिछले दिनों दिवंगत हुए महान रंगकर्मी हबीब तनवीर को सच्ची श्रद्धांजलि थी। 19 जुलाय 2009 को हबीब तनवीर के इस नाटक का मंचन नैनीताल के शैलेहॉल में किया गया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय विगत कई वर्षों [...]
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