‘वे देवता मर गये’ के परिप्रेक्ष्य में हल्द्वानी
किसी को पता है एक डॉक्टर की जैविक मौत कैसे होती है ? साधारण सा जवाब है कि एक आम आदमी की तरह वह भी कृशकाय जरावस्था में गुमनामी में तब मरता है जब उसका परिवार जानता है कि उम्र भोग कर मरे हैं। न शोक न चर्चा! हाँ, अगर किसी हादसे में मर जाते [...]
सर्वशक्तिशाली और सर्वव्यापी हैं तराई-भाबर के गलेदार
पूर्वी छोर गौला नदी के किनारे से कटघरिया तक 10 किलोमीटर और काठगोदाम से तीन पानी तक 14 किमी, कुल 140 वर्ग किलोमीटर के इस दायरे में फैले हल्द्वानी शहर की घोषित आबादी तीन लाख के करीब है। इसमें किराये में रहने वालों की सही संख्या का आंकलन नहीं हो पाया है। हर मुहल्ले में, [...]
डकैती का पर्दाफाश….मगर कब तक खैर मनायेंगे ?
16 जून को दिन दहाड़े हल्द्वानी में पुलिस के सदर दफ्तर से 200 मीटर की दूरी पर, व्यस्त सड़क पर, नैनीताल रोड मुख्य मार्ग पर ‘सोना-चाँदी’ ज्वैलर्स के यहाँ डाका पड़ा। भरी सड़क पर लुटेरों और दुकान मालिक के बेटे के बीच 20 मिनट तक गुत्थमगुत्था हुई, लुटेरे अपने साथी को फँसता देख दुकान मालिक [...]
खनन : विनाश भी, रोजगार भी
पहाड़ों से उतरती नदियाँ भाबर में सिंचाई के लिये नहरों में बँध जाती हैं। बरसात में ये नदियाँ बाढ़ के साथ रेता-बजरी का पुनर्भरण कर देती हैं। कोसी, दाबका, गौला, सूखी (नन्धौर) नदियों का बहुत बड़ा क्षेत्र रेता, बजरी, पत्थर चुगान के लिये वर्ष में 6 माह खुलता है। इस दौरान लाखों टन रेता, बजरी, [...]
आपकी टिप्पणीयाँ