श्रावण में जागेश्वर धाम
श्रावण मास के चलते इन दिनों जागेश्वर घाम में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा है। दूरदराज से हर रोज सैकड़ों लोग परिवार सहित यहाँ आकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। जागेश्वर धाम चंद राजाओं की राजधानी रहे अल्मोड़ा शहर से उत्तर पूर्व में, समुद्र तल से 1,525 मीटर की ऊँचाई पर देवदार, बाँज-बुराँश के सघन वनों के [...]
रंग ला रही है कापड़ी की मुहिम
बंजर भूमि में बहार बिखेर कर सोर घाटी पिथौरागढ़ को हरा भरा बनाने के संकल्प के साथ पिछले 28 सालों से निरन्तर पर्यावरण संरक्षण अभियान में जुटे हुए हैं ललित मोहन कापड़ी। विज्ञान स्नातक 45 वर्षीय इस शख्स ने आज से 28 साल पहले जो मुहिम शुरू की थी वह अब रंग लाने लगी है। [...]
कसूरवार कौन ? आदमी या वन्य जीव…
उत्तराखंड में लंबे समय से वन्य प्राणियों और आबादी के मध्य ‘भूख’ मिटाने की लड़ाई चल रही है। आबादी के साथ ही गुलदार को भी इसकी कीमत अपनी जान चुकाकर देनी पड़ रही है। गुलदार, बाघ, हाथी, सुअर जैसे जंगली जानवरों का कहर यहाँ की आबादी पर टूट रहा है। शेही, बंदर जैसे कई जंगली [...]
शराब के प्रचलन ने पहुँचाया होली परम्परा को आघात
बसन्त के आगमन के साथ ही लोगों के जीवन में एक बहार सी आने लगी है। प्रकृति मनों को रिझाने में लगी है। मन में उमंग व उल्लास के भाव जाग रहे हैं। होठों में मधुर संगीत उतर आया है। होली आने में अभी वक्त है लेकिन होली के बोल अनायास होठों पर आने लगे [...]
बस लिंगानुपात में अव्वल है हिमालय
5,92,971 किमी. भौगोलिक क्षेत्र में फैले 11 हिमालयी राज्यों की कुल जनसंख्या 6,36,62,309 है। इनमें 3,28,64,983 महिलाएँ और 3,07,97,326 पुरुष हैं। ये 20 नदियों का उद्गम स्थल है। यहाँ हजारों किलोमीटर में हिम ग्लेशियर फैले हैं और पानी का अपार भंडार मौजूद है। 100 से अधिक जीव-जन्तुओं की प्रजातियाँ और अथाह प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। [...]
आजीविका का जरिया बन रहा है पिरूल
चीड़ की पत्तियाँ, जो पिरूल के नाम से जानी जाती हैं, जंगलों में लगने वाली आग का सबसे बड़ा कारण हैं। लेकिन यही पिरूल, यानी ‘पाइनवेस्ट रौक्स बरगाई’ या ‘पाइन नीडल’ भी कहा जाता है, अब आजीविका का जरिया बन रहा है। उत्तराखंड सरकार द्वारा चलाई गई ग्राम्या परियोजना में पिरूल, जिसका उपयोग पहले जानवरों [...]
विकास की विडम्बना का प्रतीक है कुनल्ता
विकास के दावे कितने कागजी व कितने यथार्थ हैं, अगर इसकी खोज करने आप उत्तराखंड के गाँवों को निकल जाएँ तो शायद हर गाँव की आपबीती सुनते-सुनते झुँझला उठें। इन्हीं अनंत कहानियों में से एक कहानी है एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, जिसने देश के हजारों-हजार गाँवों के विकास की रोशनी में नहाने का सपना देखा [...]
सवालों से घिरी परियोजनायें
उत्तराखंड में चल रही बाह्य सहायतित विकास परियोजनाओं के डिजाइन व इनकी कार्यप्रणाली को लेकर जनता ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विकास परियोजनाओं में जिस तरह धाराप्रवाह अंगे्रजी बोलने वाले सलाहकारों की नियुक्ति की जा रही है, उसके चलते परियोजनाएँ धरातलीय रूप नहीं ले पा रही हैं। ऐसे विशेषज्ञों के हावी होने तथा [...]
क्यों नहीं बनी जलवायु परिवर्तन से निपटने की नीति
जनवरी माह के शुरूआती दिनों में भी पहाड़ सूखे हैं, लोग आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं। बादल नित धोखा दे रहे हैं। नदियाँ अपने निम्न स्तर पर पहुँच चुकी हैं। जिन पहाड़ों में शीत ऋतु के प्रारंभ में ही बारिश व बर्फबारी का नजारा होता था, नदियाँ लबालब भरी रहती थीं, वहाँ के हालात [...]
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