आज को बसन्त सूचना व लोक सम्पर्क विभाग का घर
क्या आपने सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग की वर्ष 2009 की निदर्शिनी देखी ? शायद नहीं देखी होगी। आप सामान्य व्यक्ति हैं और यह निदर्शिनी ‘खास’ लोगों को ही मिलती है, कुछ ही भाग्यशालियों को। अब इस लूट-खसोट प्रदेश में ‘खास’ होने के लिये क्या करतब करने पड़ते हैं, वह सब तो आप जानते भी [...]
अभिव्यक्ति की आजादी का मखौल बन गया है
आठ साल पहले अस्तित्व में आये उत्तराखंड ने विकास और जनता की खुशहाली के लिये अब तक कुछ किया हो अथवा नहीं, लेकिन कुशासन और भ्रष्टाचार आदि को लेकर यहाँ अनेक कीर्तिमान स्थापित होने लगे हैं। इसी क्रम में एक कीर्तिमान यहाँ के शासन-प्रशासन ने स्थापित किया है एक पत्रिका के पाठकों के उत्पीड़न का। [...]
…सिर्फ उनकी नजरों के लिये जिन्हें नैनीताल समाचार की परवाह है
एक बार फिर हम भिक्षा पात्र फैला कर आपके सामने आये हैं- इस बार लगभग आठ वर्ष बाद। इसे चमत्कार ही कहा जाना चाहिये कि आर्थिक दृष्टि से, शुरू से ही लड़खड़ाते हुए निकलने वाले नैनीताल समाचार के लिये ये पिछले आठ वर्ष कैसे बगैर झमेले के निकल गये ! लेकिन इस बार वास्तव में [...]
नदी अंक के साथ 32 वें वर्ष में प्रवेश
इस अंक के साथ नैनीताल समाचार अपने 31 वर्ष पूरे कर 32वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह जनमबार अंक हम ‘नदी अंक’ के रूप में निकाल रहे हैं। हालाँकि यह अंक उस रूप में नहीं निकल पा रहा है, जैसा हम चाहते थे या जैसे हमारे अब तक के जनमबार अंक निकलते रहे [...]
नये पंचायत कानून की कवायद
गोआ स्थित गांधीवादी संस्था ‘शांतिमय समाज’ द्वारा मसूरी के पास कैम्पटी के ‘सिद्ध’ परिसर में आदर्श ग्राम पंचायत अधिनियम बनाने के लिये एक तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। लगभग साल भर से चल रही प्रक्रिया के क्रम में हुए इस आयोजन में देश के 12 प्रान्तों के 45 प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें [...]
नेपाल में नया सूर्योदय
पड़ोसी देश नेपाल में एक नया सूर्योदय हो रहा है। संविधान सभा के लिये 10 अप्रेल को हुए चुनाव में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) अन्य सभी दलों से बढ़त बना कर पूर्ण बहुमत प्राप्त करने की स्थिति में पहुँच गई है। माओवादियों की इस सफलता की उम्मीद नेपाल अथवा नेपाल के बाहर किसी को नहीं [...]
पुलिस को तो मालूम ही नहीं कि प्रतिबंधित क्या है
माओवाद के नाम पर उत्तराखंड में जनता के साथ कैसा छल किया जा रहा है, इसकी बानगी हमें तब मिली, जब हमने सूचना के अधिकार के तहत प्रदेश के गृह विभाग से प्रतिबंधित साहित्य आदि के बारे में कुछ जानकारियाँ माँगी और गृह विभाग को संतोषजनक जवाब देते नहीं बन पड़ा। इस जवाब से प्रदेश [...]
सौल-कठौल : पंडित जी की याद
बाकी साल आये न आये, होली में पंडित जी की अक्सर याद आ जाती है। न जाने कैसे होंगे ? पता नहीं जिन्दा हैं भी कि नहीं। इन तीन-चार सालों में उनसे भेंट ही नहीं हो पायी। पिछली बार ही जब भेंट हुई, वे नब्बे से ऊपर थे और बीमार चल रहे थे। अगर मर [...]
नदियों की चिन्ता तो पूरे देश को है
सेवाग्राम में आयोजित तीसरे राष्ट्रीय नदी सम्मेलन के उद्घाटन में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए सुप्रसिद्ध विद्वान मुकुन्द घारे ने कहा कि हालाँकि बापू की पुण्यस्थली यह कहने के लिये उचित जगह नहीं है, लेकिन यह सच है कि आज यदि मेरी आयु पच्चीस वर्ष की होती तो मैं नक्सलवादी होता। देश की [...]
आदिवासी वन कानून को लेकर सरकार खामोश क्यों है ?
‘अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006’ एक जनवरी 2008 से पूरे देश में लागू हो गया है। लेकिन अत्यन्त आश्चर्य का विषय है कि 90 प्रतिशत से भी अधिक वन भूमि वाले उत्तराखंड में इस कानून को लेकर कोई चर्चा ही नहीं है, जबकि इस कानून के लागू [...]
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