सलाम वालेकम: केशव अनुरागी नहीं रहे : गिर्दा
गद्य में गिरदा – नैनीताल समाचार 1 जून 1993 हर पखवाड़े उत्तराखड की ताजातरीन, घटना-दुर्घटना, रोग-शोक सभी तरह की खबरें देने का दावा करने वाले हम, केशव अनुरागी जैसे कलाकार की मृत्यु का दुःखद समाचार लगभग डेढ़ माह बाद दे रहे हैं। वह भी वाया दिल्ली। नव गठित उत्तराखण्ड पत्रकार परिषद की 2 मई 1993 [...]
गिर्दा की कुछ कविताऐं
ऊँ, हम और उ उनरि नौणि है लै चुपाड़ छन हमार यों जाट दै कि पराई है लै चुपाड़ छन चैंक खुस्याल उनार सुकिला लुकुड़ाँ भितर चाऔ धैं कदुक काव छू हमार आँख उधाड़ियै निभै उनार आँखन बड़वौक जाव छू पै खबरदार रे ! होशियार हाँ !! बखताक पेटन भाउ छू जैक हाथन मैं अगिनि [...]
बाबा हम तुम्हें बहुत याद करते हैं
इस साल इत्तफाक ऐसा हुआ कि एक ओर 35 साल पहले का 25 जून 1975, इमर्जेंसी वाला दिन याद आ रहा था तो दूसरी ओर 26 जून, ज्येष्ठ पूर्णिमा बाबा नागार्जुन का जन्मदिन। वह भी शताब्दी वर्ष। इस पर इन सब बातों को खचोरने के लिये बनारस से प्रो. वाचस्पति का फोन। तो जाहिर है [...]
साल का एहतेराम
वक्त का सिलसिला यों ही चलता रहा और करता रहा बागियों को सलाम ! यों गुजरता रहा रात-दिन जुल्म से हर बगावत से पाता नया इक मुकाम। अपने–अपने समय के मेरे बागियो इस समय का तुम्हारे समय को सलाम ! हर बगावत ने जो भी नया कुछ रचा- गीत, नग्मा, रुबाई, गजल को सलाम [...]
‘बलिया’ नाम जलधार
(इस गीत की प्रेरणा-नाल और तर्ज बहुप्रचलित पारम्परिक होली-‘नदी यमुना के तीर कदम चढ़ि कान्हा बजै गयो बाँसुरिया’ से सीधे-सीधे जुड़ी है।) नदी वार, तट पार चलो रे करें यात्रा नदियों की। हाँ! करें यात्रा नदियों की। कहाँ से उपजी कहाँ समाई कहाँ भई जलधार चलो रे करें यात्रा नदियों की। ‘ताल’ से उपजी, ‘गौला’ [...]
होली-2008 : मेरि बारी, मेरि बारी, मेरि बारी,
मेरि बारी, मेरि बारी, मेरि बारी, हाई रे! अलिबेर होलिनै रंगतै न्यारी। हाई रे! अलिबेर यो देखौ मजेदारी।। धो-धो कै तो सीट जरनल भै छौ, धो-धो कै ठाड़ हूँणै ऐ बारी। हाई रे! अलिबेर होलिनै रंगतै न्यारी।। फिर बीस बरसै की छुट्टी भै कूँनी, फिरी काँ आली हमरी बारी। हाई रे! अलिबेर होलिनै रंगतै न्यारी।। [...]
है किसका अधिकार नदी पर
(धुन-नदी जमुना के तीर कदम चढ़ी) चलो नदी तट वार चलो रे चलो नदी तट पार चलो रे,करें यात्रा नदियों की नदी वार तट पार चलो रे,करें यात्रा नदियों की इन नदियों के अगल-बगल ही जीवन का विस्तार,चलो रे करें यात्रा नदियों की आज इन्हीं नदियों के ऊपर पड़ी है मारामार, चलो रे करें यात्रा [...]
मेरि कोसि हरै गे कोसि
जोड़ – आम-बुबु सुणूँ छी गदगदानी ऊँ छी रामनङर पुजूँ छी कौशिकै की कूँ छी पिनाथ बै ऊँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि। कौशिकै की कूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि।। क्या रोपै लगूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि। क्या स्यारा छजूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि।। घट-कुला रिङू छी मेरि [...]
इस व्योपारी को प्यास बहुत है
एक तरफ बर्बाद बस्तियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ डूबती कश्तियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ हैं सूखी नदियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ है प्यासी दुनियाँ – एक तरफ हो तुम। अजी वाह ! क्या बात तुम्हारी, तुम तो पानी के व्योपारी, खेल तुम्हारा, तुम्हीं खिलाड़ी, बिछी हुई [...]
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