हरेले की चिट्ठी मेघ के नाम
स्वस्तीश्री सर्वोपमायोग्य नैनीताल समाचार वालो! इस बार आषाढ़ सूखा रह गया। पानी नहीं बरसा और सावन के साथ जब बरसना शुरु हुआ तो पहली ही बरसात ने उत्तराखण्ड की धरती पर तबाही का मंजर बरसाना शुरु कर दिया। मुनस्यारी से लेकर चमोली की बिरही घाटी और उत्तरकाशी की असी गंगा के भीतरी इलाकों तक तबाही [...]
उन्होंने जिन्दगी की पाठशाला में पढ़ा
जीवन का चक्र विचित्र है, जो कई बार मनुष्य को कहाँ से कहाँ पहुँचा देता है। इस विकास यात्रा में परिस्थितियों और समाज का भी बहुत योगदान होता है। शेरदा ने स्कूल में क ख ग तो नहीं सीखा, मगर जिन्दगी की पाठशाला में इतना कुछ सीख लिया कि उन्हें ‘पहाड़ का रवीन्द्रनाथ टैगोर’ तक [...]
मुजफ्फरनगर – तुमने सब महसूस किया रतन सिंह
तुमने महसूस किया होगा कितने सौंधे महकते हैं गन्ने के नर्म खेत कितनी ठंडी कितनी मुलायम, कितनी नर्म होती है उनके नीचे की जमीन तुमने सब महसूस किया रतन सिंह चलकर गाँव की पगडंडियों से मिट्टी की कच्ची सड़क पर मोटर पर सवार होते वक्त तुम्हें याद थी पोती की फरमाइश उसकी आँखों के सामने, [...]
पहाड़ के निष्कलुष, मगर फौलादी बेटे थे विद्यासागर नौटियाल
विद्यासागर नौटियाल का जाना भारतीय साहित्य की एक बड़ी क्षति तो है ही, राजनीति में भी मूल्यों और सिद्धान्तों के एक बड़े स्तम्भ का ढह जाना है। उनका व्यक्तित्व बेहद सहज और प्रेमिल था और उनके न होने से देहरादून में अनेक महत्वपूर्ण गतिविधियों और आयोजनों में उनकी कमी सभी जागरूक लोगों को बहुत सालती [...]
मेरे सारे गुरुओं में सबसे अलग थे….
पिछले एक-दो साल से ऐसा बार-बार होने लगा है कि कुछ-कुछ दिनों बाद किसी न किसी करीबी के बिछुड़ने की खबर मिल जाती है। वैसे तो मृत्यु जीवन का शाश्वत सत्य है, मगर अपने किसी भी परिचित, करीबी या आत्मीय की मृत्यु मन को गहरे तक विचलित कर ही देती है। भगत दा का जाना [...]
एक है गिरदा
21 अगस्त 2010। शाम लगभग 4 बजे बेस अस्पताल हल्द्वानी की दूसरी मंजिल में आपरेशन थिएटर के बाहर स्टेचर पर करवट लेटे गिरदा से मैंने हाथ मिलाया था। हमेशा की तरह अपार ऊर्जा से भरे उसके हाथ की अंगुलियों ने स्पर्श की भाषा में मुझे अपने प्यार से लबरेज कर दिया। आँखों में पीड़ा तो [...]
समाज को जीवन्त बनाने के लिये वे धीमी लौ जलाते रहे
राजू रावत का जाना उत्तराखण्ड की एकता के एक बड़े सूत्र का चल बसना है। नियति ने उनके लिए जो भूमिका तय कर रखी थी वो उन्होंने पूरी जिम्मेदारी से निभायी और जब उत्तराखण्ड राज्य जैसी चीज बन रही थी, तब वे अपनी भूमिका पूरी कर रिटायर हो रहे थे। पिछले छः सालों में बार-बार [...]
अलविदा गौतम दा !
अभी कुछ दिन पहले ही तो उससे मोबाइल पर बात हुई थी। दिल्ली से लौट रहा था, घर पहुँचने से पहले न जाने मन में ख्याल आया कि चलो आज फिर बात कर लूँ। मगर अफसोस कि ऐसा सिर्फ सोचा ही, बात नहीं कर पाया और फिर दो-एक दिन बाद 10 अगस्त को वह भयानक [...]
धर्मसिंह रावत की जरूरत तो अभी बनी रहेगी
1986 में लखनऊ के जी पी ओ में गाँधी प्रतिमा के सामने धरम सिंह रावत धरने पर बैठे थे। एक आई. ए. एस. अधिकारी का व्यवस्था के खिलाफ धरने पर बैठना सभी के लिए चौंका देने वाली घटना थी। कुछ कौतूहल, कुछ मकसद के प्रति जुड़ाव और कुछ युवा पत्रकार होने का जोशा, लखनऊ के [...]
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