अभी बना हुआ है परिसम्पत्तियों का लफड़ा
राज्य गठन के सात वर्ष बीत जाने के बाद भी उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसम्पत्तियों के विभाजन के मामले निस्तारित न हो पाने से कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इनमें सिंचाई विभाग, जिसकी करीब 12 अरब की सम्पत्ति आज भी उत्तर प्रदेश के कब्जे में है, का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है। [...]
अब ग्रामीण नहीं रहेंगे, क्योंकि पनबिजली योजनायें आ रही हैं!
चाँई गाँव में भूमि धँसने से मकानों का टूटना एकदम नई बात नहीं है। उसके नीचे से अलकनंदा का पानी लाने की सुरंग बनाने से इस गाँव की भूमि लगभग पाँच सालों से धँसती जा रही है। अब उसने इतना भयंकर रूप ले लिया है कि वहाँ के निवासियों का जीवन बचाने शासन उन्हें अस्थायी [...]
सात सालों बाद भी दिशाहीन है यह राज्य
उत्तराखंड राज्य बनने पर उसकी जो मुख्य आवश्यकताएँ थीं, उनमें से कुछ की पूर्ति नहीं हुई। राज्य की क्या उपलब्धियाँ रहीं उस पर नेताओं-प्रशासकों ने इसकी सातवीं वर्षगाँठ को अवसर पर बहुत कुछ बोला है, लेकिन राज्य को जीवन में कुछ बदलाव आया भी कि नहीं, इस पर न बहस हुई और न ही राज्य [...]
शोध कार्य की दिशा कौन तय करेगा
हमारे विश्वविद्यालयों के लियेपहाड़ के बिगड़ते पर्यावरण पर खोज-खबर लेना तो दूर की बात रही, उस पर कुछ लिखा भी नहीं जा रहा है। यहाँ इस वर्ष अत्यधिक वृष्टि के कारण जुलाई, अगस्त और सितंबर में लगभग 350 लोगों की जीवनलीला समाप्त हो गई। इनमें सड़कों के टूटने और मोटर दुर्घटनाओं में 300 लोग मरे। [...]
आखिर क्यों आक्रामक हो उठे हैं जानवर
बहुत तेजी से बढ़ती जंगली सुअरों की संख्या उत्तराखंड के पहाड़ों में खेती को कुछ सालों से भयंकर नुकसान पहुँचा रही है। उनका आतंक इतना हो गया है कि राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने अभी हाल में उनको, खास तौर पर मादाओं को, मारने की आज्ञा दे दी है। उस आज्ञा के खुलासे की [...]
ग्रामीण कहाँ होता है ग्राम विकास की योजनाओं में
सरकार गाँवों में सब्सिडी वाली वित्तपोषित योजनाऐं ला रही है। यदि गाँव वाले उन योजनाओं पर अपना पैसा लगा कर या बैंक इत्यादि से कर्जा ले एक रकम खर्च करते हैं तो सरकार उन्हें उस पर लगभग 25 प्रतिशत अनुदान दे रही है। हाल में यहाँ एक सार्वभूम नाम की योजना आई, जिसमें बागवानी, ऊन [...]
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