लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2012:: वर्ष :: 35 :January 16, 2012 पर प्रकाशित
प्रस्तुत पुस्तक ‘नागा कथा ’लेखक द्वारा टाइम्स ऑफ इंडिया के संवाददाता के रूप में तथा भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के वार्ता सहायक/वार्ताकार/प्रतिनिधि के रूप नागालैंड में बिताये गए वर्षों के संस्मरणों के जरिये नागा समस्या को समझने/समझाने का प्रयास है। पुस्तक में कई रोचक संस्मरण हैं, जो पाठकों को रुचिकर लगेंगे। यथा नायब [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 30, 2011 पर प्रकाशित
सच्ची लगन हो तो मुकाम तक पहुँचने में औपचारिक शिक्षा और डिग्री की कमी आड़े नहीं आती है। इस उक्ति को चरितार्थ किया उमेश चन्द्र साह ने। श्री साह अब नहीं रहे। 89 वर्ष की आयु में उन्होंने …………..अंतिम साँस ली। अब बची हैं तो सिर्फ उनकी स्मृतियाँ और उनके विशद् अनुभव जो कि उनके [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 03 || 15 सितंबर से 30 सितंबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 1, 2011 पर प्रकाशित
बीते वर्ष 18 अगस्त को सुमगढ़ के सरस्वती शिशु मंदिर में 18 नौनिहालों की मृत्युका एक साल पूरा हो गया। इस हादसे की बरसी पर बागेश्वर के श्रमजीवी पत्रकार संगठन ने एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुँचे बागेश्वर के जिलाधिकारी सी.एस. नपलच्याल ने जिस तरह अपना दर्द छलकाया, उसके [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 1, 2011 पर प्रकाशित
वर्ष 2011-12 के केन्द्रीय बजट में सबसे ज्यादा निराशजनक तथ्य है, केन्द्र सरकार का रसोई गैस और मिट्टी तेल से सब्सिडी पूरी तरह खत्म करने का फैसला। पहले से ही दैनिक उपभोग की वस्तुओं में लगी महंगाई की आग के बीच रसोई-ईंधन के दामों में बढ़ोतरी करने के बाद आम जन को चूल्हा जलाना मुश्किल [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :April 13, 2011 पर प्रकाशित
चुनावी साल में तथाकथित लोक लुभावन योजनाओं की घोषणा, उनका सही क्रियान्वयन जाने बिना ही कर देना भारतीय राजनीति का एक विद्रूप चेहरा है। उत्तराखंड में जारी अटल खाद्यान्न योजना ने भी इस सच को साबित किया है। जीडीपी में कथित रूप से अव्वल रहे उत्तराखंड की अंदरुनी हालत का सच भी इस योजना ने [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :April 4, 2011 पर प्रकाशित
उत्तराखंड में कृषि व इससे जुड़े कार्य यहाँ के सामाजिक ताने-बाने को निर्धारित करते हैं, परंतु पलायन की प्रवृत्ति यहाँ के बाशिन्दों के खून में रच-बस गयी है। जीविका कमाने के लिये पहाड़ से मैदानों की ओर जाना तो यहाँ की पुरानी समस्या है। परन्तु हाल के वर्षों में तथाकथित विकास की सुविधाओं, यथा स्कूल, [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2010:: वर्ष :: 33 :May 24, 2010 पर प्रकाशित
सरकार की नजरों में महत्वाकांक्षी कही जा रही ‘भारत साक्षर परियोजना’ की संभावनाओं का आकलन करने से पहले जरूरी है बीते दो दशक के इतिहास को समझा जाये। भारत सरकार की इमदाद से उत्तर प्रदेश के जमाने में इस पर्वतीय भूभाग में भी करोड़ों की लागत में संपूर्ण साक्षरता अभियान संचालित किया गया। महज अल्मोड़ा [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2010:: वर्ष :: 33 :January 23, 2010 पर प्रकाशित
उत्तरायणी और बागेश्वर ये दोनों ही नाम एक दूसरे के पर्याय रहे हैं। उत्तरायणी, उतरैणी अथवा उतरैण सूर्य के उत्तरी अयन में प्रवेश का दिन है। इस भौगोलिक घटना का बागेश्वर के लिए विशिष्ट ऐतिहासिक, धार्मिक व ब्यापारिक महत्व रहा है। बागेश्वर में उत्तरायणी पर मेला आयोजन की शुरुआत कब हुई इसका कोई ठीक प्रमाण [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2010:: वर्ष :: 33 :January 23, 2010 पर प्रकाशित
उत्तराखंड के राज्य बनने के नौ वर्षों में यहाँ की बहुप्रचारित संपदा जल, जंगल,जमीन को लूटा-खसोटा ही गया है। पूरे देश में लोकतंत्र का यदि सबसे भद्दा स्वरूप देखना हो तो उसके लिए उत्तराखंड उपयुक्त रहेगा। लोकतंत्र के चारों स्तम्भों ने यहाँ अनूठी नजीर प्रस्तुत की है। लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ मीडिया को चैतन्य और [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2010:: वर्ष :: 33 :January 23, 2010 पर प्रकाशित
होना तो यह चाहिये था कि छोटी राजनैतिक इकाई बन जाने के बाद उत्तराखंड में ऐयाशी और लूट-खसोट की गतिविधियों पर अंकुश लग जाता, लेकिन पिछले नौ सालों में यहाँ पूँजीपति, नौकरशाहों व राजनेताओं के नापाक कारनामों में वृद्धि ही हुई है। राजस्थान के भगौड़े आई.पी. एस. अधिकारी मधुकर टंडन की ऐयाशी का अड्डा रहा [...]
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