‘उत्तरायण को आवाज दे गया वह’
गिरदा को पहला मंच देने वाले वंशीधर पाठक ‘जिज्ञासु’ से बातचीत ‘‘ये गिरीश तेवाड़ी हैं। अल्मोड़ा के लोक कलाकार संघ से जुड़े रहे हैं। कुमाउंनी लोक गीत जानते हैं। पहाड़ी धुनों की पकड़ अच्छी है। पहाड़ की मिट्टी से जुड़े-रमे हैं। हुड़का भी बजा लेते हैं।’’ ये शब्द प्रद्युम्न सिंह ने गिरीश का मुझसे परिचय [...]
नहीं रहे नारायण चन्द्र भारती !
कभी-कभी किसी घटना के घटित होने का पूर्वाभास होता है लेकिन जब वह घटित हो जाती है तो कहीं बहुत नीचे अंतर में वह च्यास्य सी करती हुई हूक पिराती रह जाती है। छोड़ जाती है समय के श्यामपट पर स्मृतियों की अमिट छाप। कुछ ऐसा ही हुआ जब मुझे सूचना मिली कि संस्कृत, बंगाली [...]
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