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लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2011:: वर्ष :: 34 :September 3, 2011 पर प्रकाशित
विगत वर्ष की अतिवृष्टि की तबाही देख चुके लोग इस बार मानसून आने के समय से ही आतंकित हैं। लेकिन प्रकृति जो कुछ करेगी, वह तो करेगी ही सरकार-प्रशासन ने अभी से अपना रूप दिखा दिया है। पिथौरागढ़ जनपद में जगह-जगह पैदल मार्ग तक अवरुद्ध होने से जनजीवन अस्तव्यस्त है। समय पर खाद्यान्न न मिलने [...]
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लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :July 27, 2011 पर प्रकाशित
मुख्यमंत्री की अन्त्योदय विकास यात्रा के दौरान हमें पिथौरागढ़ जिले के चार ब्लॉकों में जाने का मौका मिला। अस्कोट में मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे किसान महासभा के कार्यकर्ताओं को सभास्थल पर पहुँचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया। कांग्रेस एवं एन.एस.यू.वाई. के नौजवानों को भी प्रशासन का कोपभाजन बनना पड़ा था। पहली [...]
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लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2011:: वर्ष :: 34 :May 30, 2011 पर प्रकाशित
सर्वेक्षण कार्यों का सम्पादन मजदूरों से करवाते हुए भुगतान ठेकेदारों को करना लोक निर्माण विभाग के लिये आम बात है। इसका खामियाजा जनता को उठाना पड़ता हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना फेज पाँच में निर्माणाधीन मोटर मार्ग मदकोट-दारमा 20.650 किमी है। उक्त मार्ग का सर्वेक्षण कार्य किया लो.नि.वि. डीडीहाट ने लेकिन [...]
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लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 25, 2011 पर प्रकाशित
अस्कोट और निकटवर्ती धारचुला-मुनस्यारी विकास हेतु छटपटा रहे हैं। प्राकृतिक आपदा से यहाँ का जनजीवन त्रस्त है। पुनर्वास की नीति स्पष्ट न होने से सरकार की इस गंभीर समस्या में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्हें मालूम है कि दैवीय आपदा पर्वतीय भूभाग में आती रहती है। उनके मकबरे को कोई खतरा नहीं है। बस कुदाल [...]
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लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 19, 2011 पर प्रकाशित
ऐतिहासिक व सामरिक महत्व वाला जौलजीवी मेला 14 नवम्बर से मनाया गया। त्रिदिवसीय मेले में भारत-नेपाल-तिब्बत से व्यापारी आते थे। अब तिब्बत अपनी सहभागिता नहीं निभा पा रहा है जो चिन्तनीय है। ज्वालेख देव की भूमि पर लगने वाले इस मेले का प्रारम्भिक नाम स्थानीय गाँव दुतीबगड़ के नाम से ‘दुती मेला’ के रूप में [...]
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लेखक : कैलाश कोरंगा :: :: वर्ष :: :January 17, 2011 पर प्रकाशित
हर साल की तरह इस बार भी पिथौरागढ़ जनपद में परम्परागत रूप से आपदा का सीजन शुरू हो गया है, जबकि विगत वर्ष का चर्चित आपदा राहत का मामला आज तक नहीं सुलझा है। इस वर्ष 23 अगस्त तक सर्वाधिक वर्षा दिनांक 16 अगस्त को बेरीनाग में 120.80 मिमी दर्ज की गई है। वर्षा के [...]
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लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2010:: वर्ष :: 33 :August 18, 2010 पर प्रकाशित
‘‘भारत कृषि प्रधान देश है। यहाँ की 70 प्रतिशत जनसंख्या खेती पर आश्रित है,’’ यह वाक्य हम कक्षा दो से पढ़ते आये हैं। लेकिन उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद भी जनता के खेवनहारों ने कृषि की इस अमूल्य निधि की तरफ आँख उठाकर देखने की जरूरत नहीं समझी। जिस प्रकार पहाड़ों की सोना उगलने वाली [...]
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लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 10, 2010 पर प्रकाशित
‘‘छोटू टेबल साफ कर,‘‘ ‘‘साब के लिए चिकन, तंदूरी रोटी, एक बोतल फ्रिज का पानी जल्दी लगा,‘‘ ‘‘पहले तो ठीक काम करता था, आजकल कामचोर हो गया है। भगा दूँगा। रहना है तो दिल लगा कर काम कर।‘‘ ऐसी आवाजें सुनते ही शायद हर छोटू, रामू, कालू और न जाने कितने बाल मजदूर हड़बड़ाते हुए [...]
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लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 14, 2010 पर प्रकाशित
‘बिराण बनै गेछ, यो बिराण बनै गेछ, यो मालपा को डाना, हे काली मैया तेरी महिमा छ महान,’ गीत आज भी पूरी कारुणिकता के साथ उत्तराखण्ड में सुना जाता है। लोकगायक फकीर चन्द चिन्याल ने अपने मधुर कण्ठ से इस गीत द्वारा मालपा के मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। 17 अगस्त 1998 की काली [...]
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