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लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 03 || 15 सितंबर से 30 सितंबर 2011, अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2007:: वर्ष :: 35 :October 1, 2011 पर प्रकाशित
बहुत कम लोगों को पता होगा कि मुक्तेश्वर (नैनीताल) का नाम एक ऐतिहासिक उपलब्धि से जुड़ा हुआ है। यह उपलब्धि है पशुओं की एक खतरनाक बीमारी ‘पशु प्लेग’ (रिन्डरपेस्ट) के उन्मूलन में टीके के निर्माण की। आज की पीढ़ी ने रिन्डरपेस्ट का नाम भी नहीं सुना है। अभी 28 जून को संयुक्त राष्ट्र से सम्बद्ध [...]
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लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 1, 2011 पर प्रकाशित
ताल के किनारे मछली मारने वालों को देखना कई बार गहन अनुभूति देता है। पर नैनीताल जैसे शहर में अब ऐसे दृश्य दिखाई नहीं देते। जबकि मछली पकड़ना अब उच्च वर्ग के पर्यटकों के शौक में शामिल हो चुका है। गर्मियों का सीजन शुरू होने के साथ ही पर्यटक उत्तरी भारत के पर्यटन स्थलों और [...]
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लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 27, 2011 पर प्रकाशित
45 साल पहले एक गोपनीय अभियान की विफलता के बाद गायब हुई परमाणु ईंधन सामग्री के खतरों को लोग भुला चुके हैं। सरकार और सत्ता प्रतिष्ठान इस बारे में कोई बात करने को तैयार नहीं हैं। पिछले महीने अंग्रेजी की एक प्रतिष्ठित पत्रिका ‘कारवान’ में विनोद के. जोस की एक रिपोर्ट ने इस रवैये पर [...]
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लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 24, 2011 पर प्रकाशित
अगर बारिश कम हो तो गर्मियों में उत्तराखंड में असाधारण जल संकट पैदा हो जाता है। पिछले साल हिमपात न होने से इस बार गर्मियों में नदियों में जल प्रवाह कम रहा था। गर्मियों में प्रमुख ग्लेशियरों पर आधारित भागीरथी और अलकनन्दा जैसी नदियों में जल प्रवाह में 50 प्रतिशत की कमी आ गई थी। [...]
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लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2010:: वर्ष :: 34 :October 28, 2010 पर प्रकाशित
माटू जन संगठन ने भारी वर्षा के बाद टिहरी बांध क्षेत्र में पैदा हुए गंभीर संकट के लिए टिहरी जल विद्युत निगम (टी.एच.डीसी. ) और उत्तराखंड सरकार को दोषी ठहराया है। भागीरथी और भिलंगना के संगम पर बने इस बाँध से आसपास रहने वाले लोगों पर गंभीर संकट मँडरा रहा है। ‘माटू’ ने एक वक्तव्य [...]
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लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 10, 2010 पर प्रकाशित
वन व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने अपने रुख को साफ करते हुए देहरादून में घोषणा की कि पर्यावरण संरक्षण के साथ ही विकास की गति को बनाये रखना भी जरूरी है। उन्होंने लोहारीनाग-पाला बिजली परियोजना जारी रखने का संकेत देते हुए कहा कि इस पर पहले ही 800 करोड़ रु. खर्च हो चुके हैं [...]
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लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 5, 2010 पर प्रकाशित
तमाम विरोधों के बाद भी सरमोली-जैंती वन पंचायत के चुनाव 24 जनवरी को सम्पन्न करवा दिये गए। डीडीहाट की एस.डी.एम. दीप्ति सिंह ने नियमावली के बारे में तमाम दलीलों और अन्य आपत्तियों को खारिज करते हुए चुनाव सम्पन्न हुए घोषित कर दिये। सरमोली-जैंती वन पंचायत, मुनस्यारी की सरपंच ने चुनाव आयोजन के तरीके पर काफी [...]
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लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 7, 2010 पर प्रकाशित
मुनस्यारी में राष्ट्रीय ताप बिजली निगम लि.(एन.टी.पी.सी.) की प्रस्तावित जल विद्युत परियोजना और इसको लेकर अधिकारियों के रवैये ने क्षेत्र की जनता को आंदोलित कर रखा है। इस बार गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 100 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी हुकम सिंह बोरा के नेतृत्व में 25 गांवों के लगभग 500 लोगों ने प्रदर्शन कर अपना [...]
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लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2009:: वर्ष :: 33 :November 5, 2009 पर प्रकाशित
पर्यटन उत्तराखंड की पहचान है। चारों धामों में धार्मिक पर्यटन कई सालों से चल रहा है। नैनीताल, मसूरी, रानीखेत, अल्मोड़ा, देहरादून सहित अनेक ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जो स्वतः ही लोगों को आकर्षित करते हैं। हाल के वर्षों में साहसिक पर्यटन और इको टूरिज्म की अवधारणा ने पर्यटन की संभावनाओं में नए आयाम जोड़े हैं। [...]
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लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2009:: वर्ष :: 33 :October 8, 2009 पर प्रकाशित
माटू जनसंगठन ने केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश को पत्र लिख कर लोहारीनाग-पाला जल विद्युत परियोजना को रद्द करने की मांग की है। पत्र में जयराम रमेश के उस वक्तव्य की तरफ ध्यान दिलाया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस परियोजना का काम रोक दिया गया है और उनका मंत्रालय सभी [...]
Posted in उर्जा, जल, भ्रष्टाचार, विविध | Tagged court verdict, government, hydro power, hydro power projects, nature, पर्यावरण |
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