‘गिर्दा कहता है……’
गिरदा का जाना एक शून्य का अहसास कराता है, एक ऐसा खालीपन जिसे कोई और नहीं भर सकता, चाहे कोई लोकगायक होने का कितना ही बड़ा तमगा लटकाये क्यों न घूमे। गिरदा ने जीवन में कभी कोई समझौता अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं किया, और न अपनी वैयक्तिक कुंठा का शिकार दूसरों को बनाया। [...]
चिट्ठी पत्री : यह आपकी प्रतिष्ठा के अनुरुप नहीं..
एक सांस्कृतिक संस्था होने के नाते हम अपने नाटकों की निमर्म समीक्षा के लिये तैयार रहते हैं और एक सामाजिक सरोकारों वाले समाचार पत्र के नाते आप को किसी भी नाटक या किसी भी क्रिया कलाप की आलोचना करने का हक भी है। यह आपकी जिम्मेदारी भी है। मगर शहर में दोयम या सोयम दर्जे [...]
जनता के मंचों पर गिरदा की याद बरबस आती रहेगी
विजय जड़धारी गिरदा से मेरा मिलना जुलना भले ही कम हुआ, किन्तु कुछ मुलाकातों में ही ऐसा लगता है जैसे हम वर्षों एक साथ कार्य करते रहे हैं। उनके हाल-चाल के लिये जब मैंने शेखर पाठक से फोन पर जानकारी चाही तो तब तक वे उन्हें अलविदा कह कर आ रहे थे। गिरदा के अलविदा [...]
जहाँ आप हैं वहाँ एक दिन मैं भी आऊँगा और पूछूँगा आपसे…
डी.एन. भट्ट आदरणीय गिर्दा, बड़ा नाम सुना था आपका। सोचता था कि कब और कैसे मिलना होगा आपसे। उत्तराखंड आंदोलन में आपकी चर्चा खूब सुनी थी। आखिर नवम्बर 1999 में आपसे पहली मुलाकात हो गयी। वो भी यहाँ नहीं, टिहरी गढ़वाल में। आपको याद होगा अंजनीसैंण में भुवनेश्वरी महिला आश्रम द्वारा आयोजित ‘संचार’ विषयक कार्यशाला [...]
एक प्रवासी हिन्दीप्रेमी का अमृत महोत्सव
गोविन्द्र सिंह असिवाल अभी-अभी भोपाल में पत्रकार, हिन्दीप्रेमी और समाजसेवी कैलाश चन्द्र पंत का अमृत महोत्सव सम्पन्न हुआ। पंत जी दूसरी पीढ़ी के प्रवासी हैं। काफल, हिसालू, आड़ू, खुबानी के प्रदेश छोड़ उनके पिता इन्दौर के निकट मऊ में रम गये। वहीं कैलाश चन्द्र पंत जन्मे, पढ़े और बड़े हुए। इन्दौर से उच्च शिक्षा ग्रहण [...]
कौन खरीद पायेगा इतनी महंगी दवाओं को ?
सुशील खत्री सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ के जिला चिकित्सालय में गर्मी बढ़ने के साथ ही अनेक प्रकार की बीमारियों से पीड़ित मरीजों के भर्ती होने से शैयाओं का अभाव हो गया है। मरीजों को मरामदे में ही लेटना पड़ रहा है। सूबे के मुखिया निशंक भले ही यहाँ बेस चिकित्सालय का शिलान्यास कर गये हों, लेकिन [...]
अज्ञान और गलतफहमियों में फँसा है वनाधिकार कानून
विगत दिनों देहरादून में ‘वनाधिकार कानून: स्थिति और सम्भावनाएं’ विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन ‘उत्तराखण्ड वन पंचायत संघर्ष मोर्चा’ द्वारा किया गया। संगोष्ठी का संचालन करते हुए मोर्चा के संयोजक तरुण जोशी ने बताया कि उत्तराखंड में ‘वनाधिकार कानून’ पाँच साल बाद भी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। जबकि देश के कई [...]
प्रदेश को मिले दो नगर निगम
उत्तराखंड सरकार ने हल्द्वानी व हरिद्वार नगरपालिकाओं को भंग कर इन्हें नगर निगम बना दिया है और दोनों जगह जिलाधिकारियों को प्रशासक नियुक्त कर दिया है। हरिद्वार में ढाई लाख तथा हल्द्वानी में दो लाख की आबादी इनके दायरे में है। मुख्यमंत्री ने 21 मई को देहरादून में बताया कि दोनों नगर निगमों के गठन [...]
आशल-कुशल : 1जून से 14 जून तक
ग्रीष्म अपने चरम पर है। मैदानों में भीषण गर्मी पड़ रही है। मगर पहाड़ों में अनेक स्थानों से आँधी-तूफान, वर्षा और ओलावृष्टि के समाचार मिल रहे हैं। कई जगह पेड़ गिर गए और जनजीवन प्रभावित हुआ। ओले गिरने से अनेक स्थानों पर फलों की पैदावार पर बुरा असर पड़ा। प्रदेश सरकार ने प्रादेशिक बाल विकास [...]
एक किताब बदलाव के लिये
उत्तराखंड राज्य के गठन में पत्रकारों की एक बड़ी भूमिका थी। इस भूभाग की समस्याओं को उजागर करने के साथ ही एक पृथक राज्य के औचित्य को सिद्ध कर में पत्रकारों ने डट कर काम किया। यही नहीं, उस दौर में हुई रिपोर्टिंग ने आन्दोलनरत जनता का मनोबल बनाये रखा। इन दस-ग्यारह सालों में स्थितियाँ [...]
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