इसलिये जरूरी है कि विमान कम्पनी बचे …..
मान लीजिए सरकार इस कंपनी को वित्तीय सहायता देकर डूबने से बचा लेती है। परंतु इस बाजार पर शोध करने वाले कई महीनों से कह रहे हैं कि ये कंपनी दिवालिया है, इसमें अपने पाँव पर खड़े रहने की कूवत ही नहीं है या कहें कि अपने पंखों पर उड़ते रहने की ताकत नहीं है। [...]
जन संघर्षों से सीधा जुड़ा इस बार का उमेश डोभाल समारोह
मंदाकिनी घाटी के हृदयस्थल अगस्त्यमुनि में आयोजित 22वाँ उमेश डोभाल स्मृति समारोह विशिष्ट रहा। तामझाम से दूर नितान्त सादगी से भरा यह कार्यक्रम सही मायनों में मंदाकिनी घाटी में सिंगोली-भटवाड़ी जलविद्युत परियोजना की मार झेल रहे सैकड़ों लोगों के दर्द को समझने की एक ईमानदार कोशिश थी। 24 मार्च इस समारोह की शुरूआत स्थानीय भ्रमण [...]
आपदा उनके लिये अय्याशी बनी
प्रफुल्ल चन्द्र पन्त सितम्बर 2010 को हुई अतिवृष्टि से अल्मोड़ा जनपद बुरी तरह प्रभावित हुआ था। जनपद मुख्यालय के निकट के ही बल्टा और देवली ग्राम में कई परिवार काल कवलित हो गए । अल्मोड़ा को देश के अन्य भागों से जोड़ने वाला मुख्य मोटर मार्ग एन.एच 87 इतना क्षतिग्रस्त हो गया कि आज तक [...]
चिट्ठी–पत्री : शराब विरोधी पाठक और मुर्गा-दारु प्रेमी पत्रकार ..
शराब विरोधी लेख सटीक, वैज्ञानिक व तर्कपूर्ण नैनीताल समाचार के 15 से 31 मार्च 2012 के अंक में शम्भू राणा जी का शराब बंदी पर लेख पढ़ा…. शराब उन्मूलन तो वो पता नहीं चाहते हैं या नहीं…..पर शराब बंदी के लिए जो शराबी की मानसिकता को समझने के, उस को सुधारने की जो बात कही [...]
स्वस्ती श्री: छात्र संघ भवन यानि जुआरियों का अड्डा….
कुमाऊँ वि.वि. नैनीताल का डी.एस.बी. परिसर जुआरियों का गढ़ बनता जा रहा है। कुछ छात्र और कर्मचारी अध्ययन-अध्यापन की जगह जुआ खेलने में संलग्न हैं। सुबह ग्यारह बजे से जहाँ छात्र संघ भवन छात्र-जुआरियों का अड्डा बनता है, वहीं शाम चार बजते ही वि.वि. के तमाम कर्मचारी पुस्तकालय के बगल में ताश के पत्तों में [...]
चिणुक: जीवन का अपना अपना लक्ष्य
(‘नैनीताल समाचार’ विगत 20 वर्षों से निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों से जुड़ा रहा है। इन वर्षों में हम बच्चों की रचनाधर्मिता के कायल हुए और उसे ‘चिणुक’ के माध्यम से पाठकों के सम्मुख लाने की एक कोशिश शुरू कर रहे हैं। बच्चों यह कॉलम आप ही का है और हमें उम्मीद हैं कि [...]
सम्पूर्ण सांस्कृतिक केन्द्र की जरूरत
अतुल शर्मा देहरादून में साहित्यिक, रंगमंचीय और सांस्कृतिक गतिविधियाँ निरन्तर जारी हैं। लेकिन इन दिनों इन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है। साहित्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद देहरादून के रंगमंच ने राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाई। लेकिन आज भी यहाँ कोई ऐसा प्रेक्षागृह नहीं है, जो सही मायने में रंगमच के लिये पूरी [...]
युवा पत्रकारों ने मनाया महिला दिवस
उत्तराखंड में पहली बार पत्रकारों की पहल पर महिला दिवस पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। महिला दिवस के दिन होली और इससे पहले छह मार्च को मतगणना होने के कारण चार मार्च को हुए इस कार्यक्रम में 27 पत्रकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। देहरादून के ‘हिन्दी साहित्य समिति’ भवन में युवा पत्रकारों के [...]
ऐसे तो नहीं हो पायेगी खाद्य सुरक्षा
ईश्वर जोशी संसद में पेश किये जा चुके ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011’ के मसौदे को राजनैतिक दलों, नागरिक समूहों एवं बुद्धिजीवियों ने सिरे से खारिज कर दिया है। विधेयक में छिटपुट योजनाओं के जरिये खाद्य सुरक्षा जैसे गंभीर समस्या का सतही हल ढूँढने का प्रयास किया गया है। वैश्वीकरण के दौर में पिछले दो [...]
विकल्पहीनता की जीतें हैं ये सब
रोहित शर्मा उत्तराखंड को छोड़कर अन्य चार राज्यों में स्पष्ट जनादेश की स्थिति दरअसल इस बात का संकेत कतई नहीं है कि जनता ने इन राज्यों में अपनी मुक्ति की कमान जीते दल को सौंप दी है, जो अब उसकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करेगा। जनता भी जानती है कि जिसे जनादेश दिया गया है [...]
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