चिणुक : होशियार दीपू की चालाकी
नानतिन बाड़ी (‘नैनीताल समाचार’ विगत 20 वर्षों से निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों से जुड़ा रहा है। इन वर्षों में हम बच्चों की रचनाधर्मिता के कायल हुए और उसे ‘चिणुक’ के माध्यम से पाठकों के सम्मुख लाने की एक कोशिश शुरू कर रहे हैं। बच्चों यह कॉलम आप ही का है और हमें उम्मीद [...]
चिट्ठी–पत्री : राज्य आंदोलनकारी का सर्टिफिकेट,खुदा खैर करे
कोई राज्य आंदोलनकारी का सर्टिफिकेट पाने के लिये सड़कों पर नहीं उतरा आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण संबंधी लेख को पढ़कर मेरी अंदर की भावनाओं को शब्द मिल गये। पृथक उत्तराखंड राज्य का आंदोलन एक स्वतःस्फूर्त आन्दोलन था। इस आन्दोलन में हर वर्ग, जाति के लोगों ने अपना महान योगदान दिया। इसमें सरकारी कर्मचारी थे, व्यापारी थे, [...]
स्पार्टाकस थे विद्यासागर नौटियाल
राजकुमारी पांगती टिहरी में सरकारी नौकरी करने के दरम्यान 1977 से मैं विद्यासागर नौटियाल जी को पूरे कुनबे सहित जानती रही हूँ। अन्तिम मुलाकात देहरादून में उनके निवास पर 2007 में हुई थी। तब अपनी लिखी पुस्तकों का एक बड़ा बण्डल बाँध कर उन्होंने मुझे दिया। मेरे द्वारा दी गयी पुस्तकों के मूल्य की राशि [...]
ग्रामीण भारत – महाधोखे के जाल में
…अभी नहीं तो, सदियों तक शायद उस का उपचार नहीं !! औरंगजेब और उसके कुछ बाद तक भारत एक औद्योगिक शक्ति के रूप में विख्यात था। उस सोने की चिड़िया को देखने-समझने के लिये राजदूतों का ताँता युगों से लगा रहता था। हमारे यहाँ से धर्म-प्रचारक ही बाहर गये, कोई राजदूत नहीं गये। विश्व की [...]
आशल-कुशल : 15 फरवरी से 29फरवरी 2012
उत्तराखंड विधान सभा के चुनावों के लिए 30 जनवरी को हुए मतदान के बाद 6 मार्च को होने वाली मतगणना के पहले लगभग महीने भर के सन्नाटे के बीच भाजपा में भितरघात और आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला देखा गया जबकि कांग्रेस सबसे सफल पार्टी रहने के बारे में विश्वास से भरी हुई नजर आई। उतराखंड [...]
चल बसन्त : कवि और बसन्त
कवि और बसन्त हरे बसन्त किलै भौछै तु तन्तुक चलबसन्त त्यर हुनेर छौ अन्त कि म्यर हुनेर छु अन्त हरे बसन्त… पैलि बै तऽ भौतै मैलोकि छिये रे तु आपुँ इकलै जै के ऊँछिये दगाड़ में हिसाउ, किलमोडि़, बुराँस, काफोउ, जाणि कतु डाव बोटनकें पौयै ल्यूँछिये साल में एक बखत तु धरति कै आपण पैण [...]
एक माह आठ दिन चलती है थरूवाटी होली
नवीन बगौली उधमसिंह नगर जिले के खटीमा, सितारगंज, किच्छा, बाजपुर आदि तहसीलों में, सात उप समूहों में रहने वाली थारू जनजाति का इतिहास राजस्थान के थार मरुस्थल से जुड़ हुआ है। खुद को महाराणा प्रताप के वंशज कहने वाले थारूओं में होली एक सांस्कृतिक महोत्सव है, जिसे वे पूरे एक माह आठ दिन तक मनाते [...]
शराब ने बिगाड़ा होली का रंग
ख्याली चन्द्र जोशी पर्वतीय क्षेत्रों में होली लंबे कालखंड से मनाई जाती है। बुजुर्ग बताते हैं कि होली हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। हमारे पूर्वजों द्वारा बनाई गई यह परम्परा अपने आप में अद्वितीय है। होली के दिन सब लोग मतभेद भुला एक-दूसरे से मिलते हैं। पहाड़ों में इसे एक बड़े त्यौहार के रूप में मनाया [...]
सत्तर साल पूर्व दिल्ली की वह होली याद आती है
भगवती प्रसाद नौटियाल देहरादून में बैठे-बैठे मेरे मन में दिल्ली के चाँदनी चौक का लगभग सत्तर वर्ष पुराना वह वैश्य समाज घूम रहा है, जो दिल्ली की आन-बान और शान हुआ करता था…. सन् 1938-42 के दौरान उन होलियों में, मैं अपने कुमाउनी बंधुओं के साथ बिना रंग के भी रंगकर नाचा करता था। मेरे [...]
होली अंक के लिए सप्रेम
सम्पादक, ऐसा हो झाडू देवे पानी लावे, चिट्ठी डाले डाक में। अखबारों के पैकट बांधे, रहे लेख की ताक में। नकल-नवीसी करे कलर्की, जमादार सा हाजिर हो। रखवाली रक्खे आफिस की बस, ऐसा सम्पादक हो।। मंगता बनकर मंगा पुस्तकें, समालोचना करता हो। न्याय-तुला को रक्खे ताक में, बेसिर पैर बकता हो। अपनी धुन का [...]
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