प्रेम हिंदवान का ढोल आशा जगाता है
ढोल के तालों पर पौंणा नचाना हो या बगड्वाल। पाण्डव नृत्य हो या लास्पा, सरों, छोलिया नृत्य। प्रेम हिन्दवाल को इन सब में महारत हासिल है। सिर्फ ढोल वादन में ही नहीं, प्रेम हिन्दवाल पौंणा, बगड्वाल, पाण्डव, सारों, छोलिया आदि नृत्यों को इतनी निपुणता, कलात्मकता और परम्परागत बारीकियों के साथ कर लेता है कि आश्चर्य [...]
मान्यता है कि आपदा से बचाते हैं विश्वकर्मा
पंच केदार, पंच बदरी की भूमि कल्प क्षेत्र उर्गम घाटी में 55 वर्ष बाद विश्वकर्मा जागर का आयोजन सम्पन्न हो गया। भगवान विष्णु के 108 नामों में एक नाम विश्वकर्मा भी है। देवताओं के शिल्पी के रूप में विश्वकर्मा को माना जाता है। विश्वकर्मा के मंदिर पैनखंडा में कोशा गाँव, पल्ला गाँव, थैंग, चाईं गाँव [...]
एक बहस ने उन्हें जनूनी बना दिया…
थराली विकास खंड जनपद चमोली के सीमान्त गाँव सणकोट में बंजर भूमि में जंगल उगाकर पर्यावरण संरक्षण के लिये विशेष कार्य करने वाले नारायण सिंह नेगी गढ़वाल के गौरव नाम से भी जाने जाते हैं। जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी प्रकृति प्रेम उन्हें नहीं छोड़ता। सुभाष चन्द्र बोस के साथ एक वर्ष तक द्वितीय [...]
गौरा देवी विकास मेला सम्पन्न
उर्गम घाटी के रा.इ.का. में ‘जनदेश’ द्वारा दो दिवसीय गौरा देवी पर्यावरण एवं प्रकृति पर्यटन विकास मेले का आयोजन किया गया। मेले में प्रमुख रूप से योजना आयोग के सदस्य सच्चिदानन्द भारती, गृह मंत्रालय भारत सरकार के अवर सचिव के.एल. शर्मा एवं ‘सीड’ संस्था के निदेशक मोहन काण्डपाल के साथ क्षेत्रीय प्रधानों ने भाग लिया। [...]
‘सरकारी उपेक्षा के बावजूद पनप रही है लोक संस्कृति’
गढ़वाली लोक संस्कृति का लोहा मनवाने वाले चन्द्र सिंह राही आज भी आज भी अपने काम में जुटे हैं। प्रस्तुत हैं देहरादून में गढ़वाल सभा में इस संस्कृतिकर्मी से लक्ष्मण सिंह नेगी की छवीं बथ के अंश – प्रश्न:- अपने निजी जीवन के बारे में कुछ बतायें। उत्तर:- मेरा जन्म 1947 को गिवाली गाँव पौड़ी [...]
कमीशन खाने खिलाने के लिये है हरियाली परियोजना!
जोशीमठ तहसील की ग्राम पंचायत भर्की के अंतर्गत गत पाँच वर्षों से उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना हरियाली 775 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित की जा रही है। गत दिनों पंचायतों के पुनर्गठन की कार्यवाही के तहत भर्की पंचायत में दो पंचायतें गठित की गई और नई पंचायत ‘भेंटा’ अस्तित्व में आई। पंचायतों के गठन के [...]
कब तक मरती रहेंगी नर्मदायें ?
देश के आजादी के 60 दशक बाद भी उत्तराखण्ड के ग्रामीण अंचलों की दशा 18वीं सदी जैसी है। इसका उदाहरण पिछले दिनों जोशीमठ के अंतिम गाँव करछों में मिला। इस गाँव में मेरी सबसे छोटी साली तीन वर्ष पूर्व ब्याही गई थी। गाँव में 100 के लगभग परिवार हैं। यहाँ फरस्वाणों की बड़ी चलती है। [...]
राजमा के उत्पादन से सम्पन्न हो रहे हैं उर्गम घाटी के किसान
पर्वतीय क्षेत्र की विशेष जलवायु में बगैर रासायनिक खाद व कीटनाशकों के पैदा होने वाले कृषि उत्पाद अपने स्वाद के लिए जाने जाते हैं। इस स्वाद का एक अन्य कारण वे परम्परागत बीज भी हैं, जो सदियों से यहाँ पर प्रयोग होते रहे हैं। हालाँकि उत्पादन बहुत कम है, किन्तु सुस्वादुपन व पौष्टिकता के कारण [...]
थैंग गाँव में असंतोष है
चमोली जिले के जोशीमठ सीमान्त ब्लॉक मुख्यालय से 25 किमी. की दूरी पर बसा है थैंग गाँव। मोटर मार्ग मारवाड़ी से 12 किमी. पैदल दूरी पर है। इस क्षेत्र की जनता ने 13 अक्टूबर 2007 से 14 दिनों तक क्षेत्रीय विकास की माँग को लेकर क्रमिक धरना प्रदर्शन किया, लेकिन शासन-प्रशासन ने कोई सुध नहीं [...]
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