सुअरों के आतंक से उजड़ रहे हैं गाँव
सोमेश्वर विधान सभा के हवालबाग विकासखंड में पड़ने वाले दौलाघट क्षेत्र के गाँवों में जंगली जानवरों व आवारा पशुओं का आतंक है। हाड़-तोड़ मेहनत के बाद काश्तकार विभिन्न फसलों से अनाज व सब्जी, दालें, मसाले आदि जुटा लिया करते थे। अब यह मुश्किल हो गया है। जानवर सारी फसलें चौपट कर देते हैं। मानव जीवन [...]
क्या करेंगे डाकघर के कमीशन एजेंट ?
डाकघरों में राष्ट्रीय बचत योजना दिये जाने वाले कमीशन में कटौती कर दिये जाने से अभिकर्ताओं में रोष है। इन अभिकर्ताओं (कमीशन एजेंट) को एक प्रतिशत कमीशन दिया जाता था, लेकिन संचार मंत्रालय, भारत सरकार के दिनांक 24-11-2011 के आदेश से कमीशन की दरों में 0.50 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। इस आदेश [...]
कहाँ गये विकल्प का वादा करने वाले ?
कड़ाके की ठंड के बीच उत्तराखंड की तीसरी विधान सभा चुनने वाले कुल 63,63,914 मतदाता, जिनमें 35,45,362 पुरुष व 30,16,209 महिलायें हैं, असमंजस की स्थिति में हैं। राष्ट्रीय दलों के पास कोई मुद्दे नहीं हैं, मगर भाजपा-कांग्रेस का विकल्प देने का दावा करने वाला तीसरा मोर्चा अस्तित्व में आने से पूर्व ही बिखर गय़ा है। [...]
भवाली अल्मोड़ा राजमार्ग का विकल्प है कोसी के उस पार सड़क बनाना
सामाजिक कार्यकर्ता डूँगर सिंह खेतवाल ने मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खण्डूरी को अपने पत्र के माध्यम से वर्तमान खैरना-अल्मोड़ा मोटर मार्ग का विकल्प सुझाया है। अगर उनके सुझाये विकल्प पर कार्य शुरू हो गया तो भविष्य में खैरना-अल्मोड़ा मार्ग अवरुद्ध होने पर रामगढ़ या रानीखेत होते हुए वाहनों को अल्मोड़ा नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय के [...]
अधूरी योजनायें और दावाग्नि भी आपदायें पैदा करती हैं
आँकडे़ बतलाते हैं कि पूरे विश्व के स्तर पर 6 प्रतिशत की दर से आपदाएँ बढ़ रही हैं और इसमें मरने वाले 80 प्रतिशत गरीब तथा 20 प्रतिशत अमीर लोग होते हैं। मगर तथाकथित विकास योजनाओं से हम कितनी आपदाओं को जन्म दे रहे हैं, इस पर हमारा ध्यान भी नहीं जाता। गाड़-गधेरों में लापरवाही [...]
‘‘सख्त चट्टानों पर ही बनें मकान’’
भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी फटने, भूस्खलन, जमीन के धँसने, हिमस्खलन के अतिरिक्त मौसम परिवर्तन और तापमान बढ़ने से अंधड़, बाढ़, सूखा, दुर्भिक्ष आदि के रूप में आपदाएँ आती हैं। कुमाऊँ विश्वविद्यालय में भू विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. चारु चन्द्र पन्त बताते हैं कि हिमालय की चार हजार किमी. श्रृंखला अत्यधिक संवेदनशील है। पृथ्वी की नवीनतम [...]
…अब लीसा फैक्ट्री से दुश्चिन्ता
बसौली-सुनोली सड़क मार्ग के नीचे इनाकोट में स्थापित लीसा फैक्ट्री से स्थानीय निवासियों को भय है कि भविष्य में यहाँ का पर्यावरण प्रदूषित होगा तथा प्राकृतिक सम्पदा की लूट व गुण्डागर्दी बढे़गी। सुनोली ग्रामसभा की 13 जून को सम्पन्न आम सभा में फैक्ट्री के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया है। पर ग्रामीणों को उम्मीद [...]
ऐसा पर्यटन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकता है
बिनसर वन्य जीव विहार क्षेत्र में हक-हकूकों की मांग को लेकर नब्बे के दशक में चले आंदोलन के दौर में ही यह विचार बना था कि क्यों न इस क्षेत्र के ग्रामीण परम्परागत कार्यों से भी जुड़े रहें और पर्यटन से भी उन्हें कुछ रोजगार मिले। पर न उद्यमिता की पृष्ठभूमि थी और न आर्थिक [...]
अरे ! अभी से प्रकृति का तांडव ?
इस बार पहाड़ में प्रकृति का एक नया रूप देखने को मिल रहा है। इस साल जंगलों में धधकती आग के बदले ओलावृष्टि व विनाशकारी आँधी- तूफान की खबरें प्रमुख हैं। वैसे अप्रेल-मई में ओलावृष्टि या अंधड़ असामान्य नहीं हैं। यह ‘चल वसन्त’ कहलाता है। लेकिन गर्मी बढ़ने के साथ ऐसी घटनायें कम होती चली [...]
एक गोष्ठी हिमालय पर
पर्वतीय राज्यों के लिए परियोजनाएँ क्षेत्र की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही बनें और इसके लिए एक विशेष समूह का गठन किया जाये। यह बात ‘सेंट्रल माउन्टेन डेवलपमेंट समिट 2011’ पर प्रशासनिक अकादमी नैनीताल में सम्पन्न दो दिवसीय कार्यशाला में उभर कर आई। कार्यशाला का आयोजन ‘सेन्ट्रल हिमालयन इन्वायरनमेंट एसोसिएशन’ (चिया) तथा [...]
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