पिथौरागढ़ में बैठकी होली की परम्परा
विद्यालय जाते जीप में स्टाफ के बीच रोज किसी न किसी विषय पर कोई न कोई चर्चा शुरू हो ही जाती है। विद्यालय की पढ़ाई-लिखाई, प्रबंधन से लेकर देश-दुनिया की राजनीति, समाज, संस्कृति चर्चा के विषय बन जाते हैं। आज की चर्चा कुमाउनी होली को लेकर चल पड़ी। हमारे एक शिक्षक साथी गिरजा शंकर जोशी [...]
ब्रजेन्द्र लाल साह के रचना संसार का परिचय
ब्रजेंद्र लाल साह ने उत्तराखंड की लोक विरासत को सहेजने-सँवारने और देश-दुनियाँ तक पहुँचाने का अविस्मरणीय कार्य किया। लोक संस्कृति को एक नयी पहचान तथा सांस्कृतिक आंदोलन को एक नयी गति दी। लोक संस्कृति के विकास के लिये एक पूरी पीढ़ी तैयार की। उनके लिए लोक साहित्य मनोरंजन का साधन मात्र नहीं, बल्कि जन चेतना [...]
जरा सोचें, हम स्कूलों को सृजनशीलता की कब्रगाह तो नहीं बना रहे हैं
मनुष्य की सृजनशीलता की शुरूआत बचपन से हो जाती है। बच्चा तमाम चीजों के संपर्क में आता है। उन्हें देखता-सुनता है। उनके बीच समानता या अंतर स्थापित करता है। दूसरों के साथ अपने संबंध बनाता है। वह भाषा सीखता है और अपने तौर पर उसका प्रयोग करता है। यह उसकी पहली सृजनात्मक क्रिया है। यह [...]
रंग तो कई हैं पर अपना रंग हल्का
गंगोलीहाट की होली देखने का मौका पहले-पहल मुझे वर्ष 1993 में मिला जब मेरी पहली नियुक्ति इस क्षेत्र में हुई। उस वर्ष उपराड़ा में कवि गुमानी पर एक कार्यक्रम हुआ था जिसमें कुमाऊँ भर से अनेक विद्वान साहित्यकार इतिहासकार व संस्कृतिकर्मी यहाँ एकत्रित हुए थे। एक अच्छी शुरूआत थी परंतु न जाने क्यों आगे नहीं [...]
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