नंद कुमार उप्रेती की फाम
उन्नीस जून की उमस भरी शाम लखनऊ के भारतेन्दु नाट्य अकादमी के प्रेक्षागृह में ज्यादा लोग नहीं थे, लेकिन वहाँ जो भी आए वे या तो स्व. नंद कुमार उप्रेती को बहुत करीब से जानते थे या उनके बारे में सुन-सुन कर प्रभावित थे। उस शाम उप्रेती जी की कुमाउनी रचनाओं के संग्रह का विमोचन [...]
खुद को बटोरे बिना ही चल दिये, गुरू!
‘नैनीताल समाचार’ की फाइलें पलट रहा था। पीले और भुरभुरे हो चुके पन्नों से गिर्दा महकने लगे। ‘अच्छा ऐसा ऽऽऽ!’ कहकर गिर्दा किसी पन्ने के बीच से चहकने लगते, ‘हड़ि ’ कहकर जैसे पूरी व्यवस्था को दुत्कारने लगे। ‘शिबौ-शिब’ उच्चार कर सत्ताधारियों की खिल्ली उड़ाने लगते। किसी शीर्षक से उनका रौद्र रूप प्रकट होता तो [...]
इस तरह बीस साल बाद पौड़ी कहाँ होगा ?
25 मार्च 2010 को पूरे बीस साल बाद मैं पौड़ी (गढ़वाल) में था। सन् 1988 में युवा और जोशीले पत्रकार उमेश डोभाल की हत्या के बाद पत्रकारों-संस्कृतिकर्मियों-समाजसेवियों के लम्बे संघर्ष से अपराधी कटघरे में आने लगे थे और 25 मार्च 1990 को उत्तराखण्ड के पत्रकारों ने पहला उमेश डोभाल स्मृति समारोह पौड़ी में आयोजित किया [...]
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