वे हमें समर्थ देखना चाहते थे
नंद किशोर भगत (वीरेन डंगवाल के नन्दू बॉस और हमारे भगतदा) 14 दिसम्बर 2011 को हमें अलविदा कह गये। नैनीताल समाचार के बुनियादी स्तम्भ थे भगतदा। एक सामान्य वन कर्मी की नौकरी करते हुए अपनी अलग सोच के कारण सामाजिक सरोकारों से जुड़े। कुछ कर सकने की छटपटाहट ने उन्हें ‘उत्तराखण्ड भारती’ से जोड़ा और [...]
हमारे गणतंत्र की महानता ?
पवन राकेश भारत महान है। अब तो ओबामा, सरकोजी, जिंगताओ सबने कह दिया है कि भारत महान है। यह अलग बात है कि उनके महान मानने और हमारे महान मानने के अर्थ अलग-अलग हैं। उनको या और देशों को भारत इसलिये महान दिख रहा है कि वह एक बड़ा बाजार बन गया है, जहाँ जूते [...]
बर्फ ज्यादा पड़ गयी तो…
यूरोप मौसम के कहर से त्राहिमाम कह रहा है। आंध्र, केरल, चिन्नई बारिश के प्रकोप से काँप रहा है। उत्तराखण्ड में कभी भी बर्फबारी हो सकती है। मौसम विभाग बार-बार कह रहा है कि इस बार बारिश कम और हिमपात अधिक होने की संभावना है। पाला जबरदस्त पड़ ही रहा है। अगर उत्तराखण्ड में हिमपात [...]
हम इस गणतंत्र के काबिल नहीं
मैं तय नहीं कर पा रहा हूँ कि हम इस गणतंत्र के लायक नहीं हैं या यह गणतंत्र हमारे लायक नहीं रह गया है। गणतंत्र-लोकतंत्र की जो परिभाषा हमने पढ़ी है वह बेमानी लगने लगी है। नई परिभाषा बनाने की जरूरत है। तंत्र और लोक का रिश्ता भेड़िये और मेमने का है जो मेमने को [...]
वे हमें साधनों का सदुपयोग सिखा गये
‘चणक कभी नहीं मरेगा, वह तेरे रूप में जिन्दा रहेगा।’ कौटिल्य से कहे उसके पिता के ये शब्द न जाने क्यों दिमाग से हट नहीं पा रहे हैं। 30 नवम्बर 2009, सोमवार को जब बाऊजी (मेरे पिता नरोत्तम कुमार लाम्बा) ने अपनी साँसें पूरी कीं, तब से रील की तरह चलती जीवन गाथा में यही [...]
अमर रहे गणतंत्र हमारा
‘अमर रहे गणतंत्र हमारा’ ……. ..26 जनवरी का नाम आते ही मन में यह भाव उठ ही जाता है। कई तरह के संकल्प-विकल्प मचलने लगते हैं। अपनी तमाम विसंगतियों के साथ सत्तावन साल से हम यह सपना रोज ही देखते हैं कि कब तंत्र पर गण का राज्य होगा और हम थोड़े चैन से जी [...]
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