Browse: Home / प्रभात उप्रेती
लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2011:: वर्ष :: 35 :December 1, 2011 पर प्रकाशित
‘एक्टिविस्ट आफ वॉलेन्टरी एक्शन फार डवलपमेंट आफ ह्यूमेनिटी, लखनऊ’ से प्रकाशित और शैलेन्द्र कुमार द्वारा लिखित ’कुमाऊँ: एक परिचय’ (पृष्ठ 338) एक परिचयात्मक पुस्तक है। विविधता से भरी यह पुस्तक साहित्य में रुचि रखने वालों को भी भली लगेगी। यथा मौलाराम का वर्णन तो ऐसा लगता है जैसे ग़ालिब की प्रारम्भिक स्थिति का वर्णन हो [...]
Posted in विविध | Tagged book, kumaon, kumaoni culture, shailendra kumar, कुमाऊँ: एक परिचय |
लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 15, 2011 पर प्रकाशित
डॉ. प्रयाग जोशी की ‘यात्रायें : जीवन यात्रायें‘ पढ़ कर लगता है कि उनकी यादों से अभिभूत , आत्मज्ञान और आत्ममुग्धता परिपूर्ण एक नयी यात्रा कर रहा हूँ। ये महज यात्रायें नहीं हैं अपितु सामाजिक शोध की गाथाएँ हैं। वे अपनी यात्राओं में एतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय मनोविज्ञान की अनुभूति देते हैं। कठिन थका [...]
Posted in विविध | Tagged book release, book review, books, prayag joshi, research, travellers diary, yatra, yatrayen-jeevan-yatra |
लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2011:: वर्ष :: 34 :September 1, 2011 पर प्रकाशित
कभी कोई आता है तो लगता है, हाँ ! कोई आ रहा है। जब वह प्रोफेसर डॉ. प्रकाश उपाध्याय के साथ आते दिखे तो लगा ’कोई आ रहा है’। गोरा, खूबसूरत चेहरा, तन्दुरुस्त, लहीम शहीम शरीर …….कुछ मोटापा लिये। कोई अजनबीपन नहीं। हमें इस तरह देखते वह आ रहे थे जैसे वर्षों से देख रहे [...]
Posted in व्यक्तित्व | Tagged arjun raina, dance, kathkali, kathkali khel, new generation, pahar, pahar silver jublee program |
लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2011:: वर्ष :: 34 :February 10, 2011 पर प्रकाशित
हमारी शिक्षा प्रकाश नहीं, अंधेरा बाँटने वाली पद्धति है। इसमें भारतीय मूल्य नहीं, पाश्चात्य जगत का कचरा और पूंजीवाद का साइड इफैक्ट झलकती है। रही-सही कसर युवा अध्यापकों का जीवन नष्ट करने वाली ठेका पद्धति ने पूरी कर दी है। इसी श्रंखला में सरकारी कॉलेजों में स्थानान्तरण की पद्धति भ्रष्टाचार को पूरे नंगेपन से दर्शाती [...]
Posted in विविध, शिक्षा | Tagged education corruption, education system, education transfers, higher education, transfer, भ्रष्टाचार, शिक्षा |
लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2010:: वर्ष :: 34 :December 1, 2010 पर प्रकाशित
मैं सुबह एक अर्द्धस्वप्न से उठा कि मैं गिरदा से कह रहा हूं -आप को श्रद्धांजलि देने के लिए क्या शब्द प्रयोग किया जाय। वाकई अगर मैंने उनसे पूछा होता तो वह पहाड़ी स्टाइल में ऊकड़ूँ बैठ कर बीड़ी का एक लम्बा कश खींचते और उस कश के धुँए. को आसमान में टेढ़ा-मेढ़ा जाते देखते [...]
Posted in श्रद्धांजली, संस्मरण | Tagged girda, girda aur hudka, tribute, tribute to girda |
लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 23 || 14 जुलाई से 31 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 28, 2010 पर प्रकाशित
उसने मेरी बैठक में टँगे पोस्टर में छपी कविता को पढ़ा – वह मारे जायेंगे ……. जो सच-सच बोलेंगे कत्ल कर दिये जायेंगे जो विरोध में बोलेंगे जो गुन नहीं गायेंगे मारे जायेंगे सबसे बड़ा अपराध है इस समय निहत्थे और निरपराध होना जो अपराधी नहीं होंगे मारे जायेंगे पोस्टर में सत्ता द्वारा मारे गये [...]
Posted in विशेषांक, हरेला-अंक | Tagged government attrocities in india, hem pandey encounter, martyr, marxism, murder, naxal movement |
लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 21, 2010 पर प्रकाशित
संस्कृति के नाम पर उत्तराखंड में बरसाती गाड़-गधेरों की तरह गीतों के वीडियो कैसेट निकल रहे हैं। यह लोगों की दिखास की ललक है। यह छपास के समानान्तर तृष्णा है। अगर आपके पास पैसा हो तो धन दे कर हीरो-हीरोइन बनिये, कैसेट निकालिये और टी.वी. या कम्प्यूटर में छाने की इच्छा पूरी कीजिए। अब चाहे [...]
Posted in विविध | Tagged kaladurpan, new casseette, new releases, pramila joshi, preeti ranakoti, rajnikant semwal, rama cassetes, soniya anand, surakshya rawat, t series, tikuliya mama |
लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2010:: वर्ष :: 33 :January 9, 2010 पर प्रकाशित
महेश पुनेठा का नया संग्रह ’भय अतल में’ की कविताएँ अंदर तक छूती हैं। न सर के ऊपर जाती हैं न कोफ्त पैदा करती है। हर कविता में अपनापन और घरेलूपन दिखता है और अन्य कवितायें पढ़ने के लिए विवश करता है। यह विवशता सार्थक होती है। इसमें मजा ही नहीं आता यह अंदर भी [...]
Posted in विविध | Tagged book release, mahesh punetha, कविताऐं-छंद-शेर |
लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2009:: वर्ष :: 33 :December 9, 2009 पर प्रकाशित
मुख्यमंत्री जी आए हैं। जनता दरबार लगाये हैं। आये हैं राजन। एक-एक को बुलाये हैं। फरियादियों से भरा है आंगन, समस्याओं से भरे जन के मन। आधुनिक राजा से मुखातिब है जनता। आशाओं से लबालब है- के पत्त अब के हो ही जायेगा मामला आरपार। मिलेगा शुभ समाचार। वैसे, हर बार होती है जनता हताश, [...]
Posted in विविध | Tagged janta darbar, politics, prabhat upreti, ramesh pokhariyal |
लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2009:: वर्ष :: 33 :November 21, 2009 पर प्रकाशित
अंग्रेज सरकार ने उदारतापूर्वक मिशनरियों को जमीनें दी थीं और उन्होंने शिक्षा के विकास और समाज सेवा के रूप में उनका अच्छा उपयोग भी किया। पर हाल के वर्षो में अल्मोड़ा से लेकर पौड़ी तक में जिस तरह उनके चर्च द्वारा जमीनें बेचे जाने का प्रयास हो रहा है, उससे विवाद उठ रहे हैं। पिथौरागढ़ [...]
Posted in विविध | Tagged chandak land, laprosy mission |
पृष्ठ 1 कुल 3 पृष्ठों में..पृष्ठ : 123»
आपकी टिप्पणीयाँ