बहुत बड़ा शून्य छोड़ गया है डॉ. डी. डी. शर्मा का निधन
16 मार्च को पद्मश्री डॉ. डी.डी. शर्मा का 87 वर्ष की आयु में देहान्त होने से देश ने एक उद्भट भाषाविद खो दिया। 24 अक्टूबर 1924 में नैनीताल जिले की नौकुचियाताल झील के निकट जंगलिया गाँव में पैदा हुए देवीदत्त शर्मा अपने पाँच भाइयों में चौथे नम्बर के थे। तीन वर्ष की उम्र में उनके [...]
पनघट पर छयल चलो बरछी
होली को कामकाका के अगियाये हुए जीवन का ‘इजर’ समझना चाहिये। पाँच दिनों में फाँणा, काटा, सुखाया और जलाया। इस ऊखड़ मल्याट में रतिकाकी को भी साथ रहना पड़ता है। जिस समय आग धमकी होती है उस समय वह हाथ में हाथ धरे तमाशा नहीं देखती। पानी-पन्यार, नदी-पनघट की सोचती है। आग और पानी के [...]
चाँचरी धमाको के बहाने लोक की चर्चा
हिन्दी की बोलियों में, लोक साहित्य की विभिन्न विधाओं के संकलन और अध्ययन में देवेन्द्र सत्यार्थी, राहुल सांकृत्यायन, बनारसी दास चतुर्वेदी, वासुदेवशरण अग्रवाल जैसे लेखकों का योगदान उल्लेखनीय है। कुमाउँनी और गढ़वाली के लोक साहित्य टटोलने- थाहने की ओर पहले पहल लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, नृवंश शास्त्री डॉ. धीरेन्द्र मजूमदार का ध्यान गया। संयोग से [...]
आपत काल बिरस भयो फागुन… …उचित होय सो की जै
बोनासाही आमों व देसी लीचियों में बौर आ गई हैं। लाई-सरसों, मूली और धनियाँ के फूलों से घरबाड़े और खेत भरे हुए हैं। तोतों और गोंतालों की चहचहाहट से यूक्लिप्टस का पेड़ चारबाग स्टेशन की तरह शोरियाया हुआ है परन्तु कोयल नहीं दिख रही। हेमंत में, काले कौवों और कोयलों के झुण्ड बाबा रामदेव के [...]
उत्तराखण्ड की एक और प्रतिभा पद्मश्री से सम्मानित
हल्द्वानी के नवाबी रोड स्थित आनन्दधाम निवासी 86 वर्षीय डॉ. डी.डी. शर्मा को इस वर्ष पद्मश्री के अलंकरण से सम्मानित किया गया है। 2011 के वर्ष इस सम्मान से नवाजे गए, उत्तराखण्ड के वे अकेले व्यक्ति हैं। उन्हें अलंकृत होने की खबर से जम्मू कश्मीर से लेकर अरुणाचल तक फैले हुए हिमालयी राज्यों के कलमजीवियों [...]
किताबों के बारे में : उत्तराखण्ड की लोक कलाएं एवं शिल्प कौशल
उत्तराखण्ड के पर्वतीय भूगोल में खेती व पशुपालन के विकास, मकानों व मंदिरों का निर्माण, धुनने, कातने, बुनने, खेती व वाद्ययंत्रों के निर्माण, आभूषण बनाने, धातुओं को शोधने, मिट्टी व लकड़ी के बर्तन बनाने, कागज, रंग-रोगन व श्याहियों के निर्माण, चमड़े व औषधियों के परिष्करण सहित उनके उत्पादों के रख-रखाव आदि को लेकर मानवीय जीवन [...]
भज भक्तन के हितकारी, सिरी कृष्ण मुरारी
हमारे यहाँ कौन होली किस दिन गानी है, इस तरह का चुनाव परम्परा-परिपाटी से ही देखने में आता है। देशाचार के अनुसार दशमी बेध एकादशी को देवी-देवताओं की होलियाँ होती हैं। आँवला एकादशी और द्वादशी को भगवान की बाल-लीलाओं, विनय और स्तुतियों की होलियाँ सुनने को मिलती हैं। त्रयोदशी से रस की होलियों के साथ-साथ [...]
आपकी टिप्पणीयाँ