याद रहेंगे पत्तीदास
टिहरी रियासत के प्रजामण्डल एवं आजादी के बाद उत्तर प्रदेश की अन्तरिम सरकार में विधायक रहे पत्ती दास का पिछले पखवाड़े अपने पैतृक गाँव धारी (उत्तरकाशी) में निधन हो गया। वे 92 वर्ष के थे। वे अपने पीछे पूरा-भरा परिवार छोड़ गये हैं। उनकी अस्थियाँ हरिद्वार में उनके सुपुत्र सहसपुर के विधायक राजकुमार ने विसर्जित [...]
पर्यटन प्रदेश में तीर्थयात्रियों की लूट-खसोट
उत्तराखंड के चार धामों में से बद्रीनाथ और गंगोत्री तक मोटर यातायात सुलभ है। यमुनोत्री व केदारनाथ हेतु क्रमशः 6 किमी. और 14 किमी. पैदल रास्ता है। इस बार हम देहरादून से चल कर सबसे पहले 162 किमी. दूर जानकीचट्टी पहुँचे, जहाँ से यमनोत्री मात्र 6 किमी. है। मसूरी और कैम्पटीफॉल तक का सफर बड़ा [...]
पेयजल योजनाओं में परम्पराओं का ध्यान रखना जरूरी है
हिमालय फाउंडेशन के सहयोग से किये गये एक अध्ययन में पाया गया कि जहाँ लोग परम्परागत ढंग से प्रयोग कर रहे हैं, वहाँ पानी की उपलब्धता बनी है। अन्यथा आये दिन पानी का संकट गहराता जा रहा है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बर्नीगाड़ स्थित गंगनाणी धारा का उदाहरण लें। एक प्रचलित दंतकथा के अनुसार जब [...]
ठेकेदारी पर रोक कैसे लगे ?
सन 1993 में 73वाँ तथा 74वाँ संविधान लागू होने से उम्मीद जगी थी कि भारत के सभी गाँव जल्दी ही विकास की मुख्य धारा से जुड़ जायेंगे। तब कहा गया था कि पंचायतों के अधीन 29 विभाग होंगे, किन्तु 14 वर्ष गुजर जाने के बाद भी मात्र शिक्षा विभाग ही पंचायतों के अधीन किया गया [...]
विकास की दिशा पर गोष्ठी
विकास की जनाधारित नीतियों को जमीनी स्तर पर उतारने की रणनीति पर विचार-विमर्श करने के सिलसिले में विश्व नागरिक मंच, जल संस्कृति मंच एवं हिमालयी पर्यावरण शिक्षा संस्थान द्वारा हिमालय भागीरथी आश्रम, मातली में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में उत्तराखण्ड के जल, जंगल, जमीन पर वैश्वीकरण का प्रभाव बढ़ता तापमान, पिघलते [...]
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