दूर की कौड़ी है ‘विकल्प’
उत्तराखंड विधान सभा के चुनाव नतीजे उम्मीद के अनुरूप ही रहे। त्रिशंकु विधान सभा होगी और सरकार कांग्रेस की बनेगी ऐसी उम्मीद की जा रही थी। बसपा और यूकेडी की सीटों को लेकर भी ऐसा ही अनुमान राजनितिक हलकों में लगाया जा रहा था। राज्य में तीसरी ताकतों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। राज्य की राजनीति [...]
बकवास है पुनर्वास नीति
पुरुषोत्तम शर्मा उत्तराखण्ड आपदा एवं पुनर्वास नीति 2011’ एकदम निराशाजनक है। इसमें भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने के लिए आधुनिक सूचना तकनीकी का अधिकतम इस्तेमाल और आपदा पीडि़तों के स्थायी पुनर्वास के साथ उनके पुश्तैनी रोजगार की सुरक्षा के मुद्दे अहम होने थे। अखिल भारतीय किसान महासभा [...]
सुनहरा कुछ भी नहीं है इस बजट में
12 मार्च को सदन में प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा पेश वर्ष 2011-12 के बजट में कुल अनुमानित वार्षिक बजट 19366.91 करोड़ रुपये में से योजनागत मद में मात्र 6564.29 करोड़ ही रखे गये हैं। बाकी 12802.62 करोड़ रुपये गैर योजनागत मद में हैं। यानी बजट का लगभग दो तिहाई खर्च इस शासन-प्रशासन को चलाने के [...]
कृषि क्षेत्र का विस्तार जरूरी है
राज्य का गठन हुए अब दस वर्ष पूरे हो गये हैं। मगर अब पलायन पहले के किसी भी समय से ज्यादा हो रहा है। पहाड़ में घर के घर खाली हो रहे हैं और जमीनें बंजर पड़ रही हैं। कृषि क्षेत्र की घोर उपेक्षा ने यह स्थिति पैदा की है। राज्य की कुल आबादी का [...]
वनाधिकार कानून लागू करवाने के लिए जरुरत है एकजुट संघर्ष की
अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) कानून उत्तराखंड में नवम्बर 2008 से लागू किया गया है। मगर इस कानून के दायरे में आने वाले लाभार्थियों के चुनाव ने राज्य सरकार और राज्य की अन्य शासक वर्गीय राजनीतिक पार्टियों की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। इन सवालों पर रोशनी [...]
राष्ट्रीय रोजगार गारण्टी योजना के नाम पर किया जा रहा है ग्रामीणों का उपहास
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून मनरेगा को इस देश में लागू हुए चार साल हो चुके हैं। केन्द्र की यूपीए सरकार और कांग्रेस पार्टी इसे अपने शासन काल की सबसे बड़ी उपलब्धि पेश कर रही है। वैसे भी हमारे देश में यह पहला ऐसा कार्यक्रम है, जो संसद द्वारा पारित कानून के तहत देश [...]
किसानों के हक की बात नहीं कहती नई कृषि नीति
अभी हाल में उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य के लिए एक नई कृषि नीति का मसौदा तैयार किया है। इस मसौदे में क्या है यह तो पता नहीं पर इसे तैयार करने का काम जिस तरह किया गया वह पूरी तरह आपत्ति करने लायक है। राज्य के लिए नई कृषि नीति का मसौदा तैयार किया जा [...]
मुझे अपनी माँ में दिखता था बेटी का चेहरा
26 नवम्बर 2007 को माँ ने मेरी गोद में अंतिम सांस ली। अभी-अभी पांच मिनट पहले उसने मेरे सिर और गालों को एक हाथ से सहलाया था और मेरी गोद का सहारा लिया था। मगर अब उसका निस्तब्ध शरीर मेरे सामने था और सर मेरी गोद में। मैं उसे निहारते हुए सैंतालीस साल पूर्व की [...]
समस्या का समाधान नहीं है भू अध्यादेश
कांग्रेस सरकार द्वारा दो बार, पहला 12 सितम्बर 2003 को और दूसरा 15 जनवरी 2004 को, भू अध्यादेश लाये जाने के बाद भाजपा की खंडूरी सरकार भी 2 मई 2007 को एक नया भू अध्यादेश ले आई। क्या माना जाये कि राज्य की राजनीति में जमीन का सवाल सचमुच प्राथमिकता में आ गया है ? [...]
आपको भ्रष्टाचार क्यों नहीं दिखाई दे रहा है ऐरी जी ?
उत्तराखंड में आजकल भाजपा के नेता और कार्यकर्ता शर्मशार हैं। वे शर्मशार हैं क्योंकि राज्य में अपनी ही सरकार और अपने मुख्यमंत्री की तारीफ में वे ऐसे कसीदे नहीं गढ़ पा रहे हैं, जैसा कि उक्रांद के नेता भाई काशी सिंह ऐरी गढ़ रहे हैं। ऐसे में भाजपा कार्यकर्ताओं का शर्मशार होना लाजिमी है। आखिर [...]
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