छोटा मुँह छोटी बात किल्लत की रोटी बनाम जि़ल्लत की रोटी है
पहले किल्लत की रोटी थी अब जि़ल्लत की रोटी है किल्लत की रोटी ठंडी थी जि़ल्लत की रोटी गर्म है बस उस पर रखी थोड़ी शर्म है थोड़ी नफरत थोड़ा ख़ून लगा है इतना नामालूम कि कौन कहेगा ख़ून लगा है हर कोई यही कहता है कितनी स्वादिष्ट कितनी नर्म कितनी ख़ुशबूदार होती है यह [...]
छोटा मुँह छोटी बात : उन्मुक्त को उत्तराखंड से परीक्षा देनी चाहिये थी…
‘अनूठों में अनूठा मामला’ मानते हुए आखिरकार दिल्ली विश्वविद्यालय और सेंट स्टीफेंस कॉलेज ने विश्व कप विजेता भारतीय अण्डर-19 क्रिकेट टीम के कप्तान उन्मुक्त चंद को दिल्ली वि.वि. की परीक्षाओं में सम्मिलित हो सकने के लिए, कक्षाओं में आवश्यक न्यूनतम उपस्थिति के प्रकरण में, विशेष छूट देते हुए सेकेण्ड सेमेस्टर की परीक्षाओं में बैठने की [...]
छोटा मुँह छोटी बात : कैसी शपथ कैसी प्रतिज्ञा!!
उत्तराखण्ड में ‘हिन्दुस्तान’ अखबार द्वारा ‘हिमालय बचाओ अभियान’ के अन्तर्गत 1 सितम्बर से 9 सितम्बर तक हिमालय प्रतिज्ञा का कार्यक्रम चलाया गया और हजारों की तादाद में स्कूली बच्चों ने इसमें हिस्सेदारी कर प्रतिज्ञा की कि वे हिमालय की रक्षा का हर संभव प्रयत्न करेंगे। ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे, जिससे हिमालय को नुकसान पहुँचता [...]
छोटा मुँह छोटी बात: चुप्पी तोड़ो,बोलो
आप अन्ना और उनके सहयोगियों के आंदोलन के प्रति संशयग्रस्त रहे हों या असहमत, तो भी इतना तो मानेंगे कि आंदोलन के पहले दौर में जनता की जबर्दस्त भागीदारी ने जन लोकपाल के मामले में एक बार सरकार को झुकने पर विवश तो कर ही दिया था। यह बात दीगर है कि उसके बाद किस [...]
छोटा मुँह छोटी बात : रोटी से खेलता बोलता आदमी
एक आदमी/रोटी बेलता है/एक आदमी रोटी खाता है/एक तीसरा आदमी भी है/जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है/वह सिर्फ रोटी से खेलता है/मैं पूछता हूँ- ‘यह तीसरा आदमी कौन है’ ? मेरे देश की संसद मौन है। संसदीय लोकतंत्र के नेहरू युग की समाप्ति और इंदिरा राज के सूत्रपात के उन दिनों में [...]
छोटा मुँह छोटी बात :रिश्ता नाड़े और पेटीकोट/पाजामे के बीच…..
‘जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ यदि नेपथ्य में बज रहा हो तो संसार के सभी देश सदा महान होते हैं। भारत भी एक महान देश है। ‘मेरा भारत महान’ इसी की अभिव्यक्ति है किन्तु बीच-बीच में हम कुछ ऐसा कर बैठते हैं या हो जाता है कि ‘सौ में निनानब्बे बेईमान फिर भी मेरा भारत [...]
छोटा मुँह छोटी बात: स्माइलिंग बुद्धा से स्मेलिंग़ बुड्ढा तक….
पोखरण में भारत द्वारा किए गये परमाणु परीक्षण के लिए अपनाये गए कोडनेम ‘स्माइलिंग बुद्धा’ की कुरूपता को एक कविता के माध्यम से सामने रखते हुए हरीश चन्द्र पाण्डे ने हमारे वक्तों में शब्दों, संज्ञाओं के खोखलेपन और पाखंड की ओर एक शानदार इशारा किया है। देखें: ‘लाल इमली’ कहते ही इमली नहीं कौंधी दिमाग [...]
छोटा मुँह छोटी बात: गैस,पानी और मुख्यमंत्री का दौरा
‘शहर में पानी कम है कहते हैं आप/पर जब होता आपकी बेटी का ब्याह/सारी नगरपालिका का पानी/उड़ेला गया आपके लॉन पर-खैर क्यों,यानी/$$$/जबकि आम लोगों को मिलता/हर दूसरे दिन पानी , कम से कम/तो महामहिम , क्या आप उम्मीद नहीं करते/कि बेहतर तरीके से चीजें बाँटी जाएँ/तभी होगा न्यायपूर्ण समाधान कोई !’’ कुकिंग गैस और नल [...]
छोटा मुँह छोटी बात :अंग्रेजों से हमें सीखना चाहिए था मगर….
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता ‘गरीबी हटाओ’ का एक अंश है ……‘गरीबी हटाओ सुनते ही/उन्होंने बड़े बड़े नक्शे बनाए/ आँकड़े इकट्ठे किए/और उन्हें रटने लगे/नक्शों की वर्दी पहन/जब वे एक कतार में खड़े हुए/ और राष्ट्रीय धुन बजने लगी/तब उन्होंने कवायद शुरू की/और एक ही जगह पर पैर पटकने लगे।’ एक और टुकड़ा अक्सर याद [...]
छोटा मुँह छोटी बात : ‘मित्र पुलिस’ से ‘दाज्यू/बैणी पुलिस’ तक
हरीश चन्द्र पाण्डे की कविता ‘अखबार पढ़ते हुए’ की कुछ पंक्तियाँ हैं…..‘ट्रक के नीचे आ गया एक आदमी /वह अपने बायें चल रहा था/एक औरत नहीं रही अपने खेत में अपने को बचाते हुए/एक नहीं रहा डकैतों से अपना घर बचाते हुए/ये कल की तारीख में लोगों के मारे जाने के समाचार नहीं/कल की तारीख [...]
आपकी टिप्पणीयाँ