अधिकार तो देर सबेर देने ही होंगे
केन्द्रीय व्यवस्था आम आदमी तक पहुँच बनाने की अवधारणा से ही कटी हुई होती है। राजशाही में भी आम जन तक वही व्यवस्थायें पहुँची हैं जो अधिकतम विकेन्द्रित रही हैं। यह इतिहास के अनेक उदाहरणों में देखने को मिलता है। लोकशाही में केन्द्रीकरण के पक्षधर अलोकतंत्र की प्रेतच्छाया के पुजारी हैं। लोकतंत्र जनता का राज [...]
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