लेखक : रीता खनका :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 16, 2011 पर प्रकाशित
उत्तराखण्ड प्री-मेडिकल टेस्ट में प्रवेश परीक्षा के लिए मूल निवास प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता ने प्रदेश में राजनैतिक तूफान खड़ा कर दिया। तीन मैदानी जिलों के प्रशासन ने ऐसा कोई नियम न होने का आधार बता कर प्रमाण-पत्र देने से इंकार कर दिया। राज्य के मुख्य सचिव सुभाष कुमार का भी कहना था कि यू.पी.एम.टी. के [...]
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लेखक : रीता खनका :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 29, 2010 पर प्रकाशित
तथाकथित औद्योगिक विकास के कारण भले ही उत्तराखंड विकास दर के मामले में तीसरे स्थान पर हो, लेकिन इस विकास दर में खेती का योगदान लगातार घट रहा है। नाबार्ड के स्टेट फोकस पेपर के अनुसार, वर्ष 1999-2000 में उत्तराखंड में खेती का अंश 38 प्रतिशत था, जो अब घटकर 22 प्रतिशत पहुँच गया है। [...]
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लेखक : रीता खनका :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 10, 2010 पर प्रकाशित
जल, जंगल, जमीन जैसे बुनियादी सवालों को लेकर संघर्ष करने वाले जन संगठन अब मिलकर उत्तराखंड में बन रहे सभी बड़े बाँधों का विरोध करेंगे। इन संगठनों ने बड़े बाँधों के स्थान पर छोटे बाँध व ‘रन ऑफ रिवर’ के तहत परियोजनायें बनाये जाने की माँग की है। उत्तराखंड में समय-समय पर जन सरोकारों के [...]
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लेखक : रीता खनका :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2010:: वर्ष :: 33 :January 23, 2010 पर प्रकाशित
दून घाटी में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 6 मई 2009 से नदियों में खनन और चुगान पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। याचिकाकर्ता ने केन्द्र की उस अधिसूचना को आधार बनाते हुए, जिसके तहत 1 फरवरी 1989 को दून घाटी में खनन पर रोक लगी थी, कहा कि [...]
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लेखक : रीता खनका :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 14, 2008 पर प्रकाशित
ग्रामीण पत्रकार एसोसिशन के चौथे वार्षिक सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए विधान सभा अध्यक्ष हरवंश कपूर ने पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ बताया। देहरादून में 15 फरवरी 2008 को हुए ग्रामीण पत्रकार एसोसियेशन के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कपूर ने कहा कि आपात्काल के दौरान कई अखबारों ने [...]
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