‘गढ़वाली’ को याद करते हुए की सिविल नाफरमानी की घोषणा
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के पेशावर कांड की स्मृति में जागेश्वर (अल्मोड़ा) में आयोजित सम्मेलन में देशभर के विभिन्न हिस्सों से जुटे आंदोलनकारियों ने गढ़वाली से ही प्रेरणा लेते हुए जनविराधी नीतियों और कानूनों की सिविल नाफरमानी का प्रण लिया। इस अवसर पर स्थानीय आयोजक उत्तराखंड लोक वाहिनी के अध्यक्ष शमशेर सिंह बिष्ट ने आयोजन [...]
एक जनयात्रा उत्तराखंड की बेहतरी के लिये
वीर चन्द्रसिंह गढ़वाली के पेशावर कांड स्मृति दिवस के मौके पर 23 अप्रेल को जागेश्वर में होने वाले ‘पानी’ को लेकर किये जाने वाले ‘सिविल नाफरमानी’ आन्दोलन की तैयारी के लिये की गई, 10 मार्च से 20 मार्च तक की जनयात्रा बेहद अनुभवसम्पन्न करने वाली थी। यह जनयात्रा उत्तराखंड की समकालीन स्थितियों और उनकी बेहतरी [...]
अन्तर्राष्ट्रीय दबाव और कंपनियों के लालच के बरक्स परियोजनायें
हाल के सालों में उत्तराखंड में बादल फटने की घटनाओं और इससे हुई तबाही में इस कदर बढ़ोतरी हुई है कि बरसात का मौसम पहाड़ों में दहशत का मौसम लगने लगा है। बादल फटना और भूस्खलन अप्राकृतिक नहीं हैं। लेकिन इन घटनाओं में हो रही बढ़ोतरी स्वाभाविक नहीं है। मानवीय दखल ने ही इन आपदाओं [...]
गिर्दा के बाद: गिर्दा की याद–नैनीताल 2011
यह समागम गिर्दा के बहाने ही संभव था। साहित्य, संगीत, रंगमंच और अन्य विविध कलाकर्मों में दखल के साथ ही जनपक्षीय राजनीति में भी सक्रिय रहे गिर्दा ही इनसे जुडे़ उत्तराखंड के महत्वपूर्ण लोगों को साथ जुटा सकते थे। सो ‘पहाड़’ के बैनर तले ये लोग गिर्दा को याद करने 23 और 24 दिसम्बर को [...]
हरेले के तिनड़े के साथ बधाई
हैलो!…. नैनीताल समाचार और इसे पढ़ने वालो!…. हैप्पी हरेला…। तमाम एस. एम. एस. के जरिये ऐसे ही पहुँचनी हैं आपके फोनों में हरेले की शुभकामनाएँ तो मेरे पत्र में भी ऐसे ही सही। और फिर अब तो नैनीताल समाचार का इन्टरनेट संस्करण भी आ गया है। कुछ तो मॉडर्न यहाँ भी होना चाहिए। खैर…. अब [...]
‘मूर्तता-अमूर्तता के द्वन्द्व से हर कलाकार गुजरता है’
कुमाऊँ विश्वविद्यालय के सोबनसिंह जीना परिसर अल्मोड़ा में अध्यापन कर रहे डॉ. शेखर जोशी स्वयं की विकसित की हुई शैली ‘नेल पेण्टिंग’ में अपने अद्भुत् चित्रांकन के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं। यूँ तो उन्होंने चित्रकला की अन्य विधाओं पर भी काम किया है, लेकिन नेल पेंटिंग में नाखूनों द्वारा आकृति रचना और [...]
वन संरक्षण की नीतियों में जनहित को नहीं दी जाती तरजीह
उत्तराखण्ड का तकरीबन 45 फीसदी भाग वनों से ढँका पड़ा है। अगर उच्च हिमालय की वनस्पतिरहित, सदा हिमाच्छादित चोटियों को छोड़ दिया जाये, तो वन यहाँ के 66 फीसदी क्षेत्रफल को घेरे हैं। भारत में कुल क्षेत्रफल का 33 फीसदी वन क्षेत्र होना पर्याप्त माना गया है। इस दृष्टि से हम एक समृद्ध राज्य हैं। [...]
पंचेश्वर बाँध: झेलनी ही होगी एक और बड़े विस्थापन की त्रासदी
कुछ समय पूर्व ‘नैनीताल समाचार’ ने उत्तराखण्ड की नदियों पर प्रस्तावित छोटे-बड़े बाँधों को काले धब्बे से दर्शा कर एक नक्शा प्रकाशित किया था। सैकड़ों बाँधों से लगभग पूरा नक्शा ही काला हो गया था। बाँधों से उभरी यह कालिख प्रतीकात्मक रूप में तथाकथित ऊर्जा प्रदेश के भविष्य को भी रेखांकित करती है। वर्तमान में [...]
आबकारी विभाग गंगोलीहाट में क्यों बिकवाना चाहता है शराब ?
सरकार को मिलने वाले राजस्व की दुहाई दे-दे कर आबकारी विभाग गंगोलीहाट में शराब की दुकान खोलने को लेकर निरन्तर प्रयासरत है। विभाग के ये प्रयास तब से ही जारी हैं, जब से गंगोलीहाट में महिलाओं के नेतृत्व में 2006 में चले बड़े आंदोलन ने यहाँ शराब की दुकान को बन्द करवा दिया था। विभाग [...]
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