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लेखक : रोहित जोशी :: :: वर्ष :: :January 18, 2012 पर प्रकाशित
यह समागम गिर्दा के बहाने ही संभव था। साहित्य, संगीत, रंगमंच और अन्य विविध कलाकर्मों में दखल के साथ ही जनपक्षीय राजनीति में भी सक्रिय रहे गिर्दा ही इनसे जुडे़ उत्तराखंड के महत्वपूर्ण लोगों को साथ जुटा सकते थे। सो ‘पहाड़’ के बैनर तले ये लोग गिर्दा को याद करने 23 और 24 दिसम्बर को [...]
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लेखक : रोहित जोशी :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 18, 2011 पर प्रकाशित
‘रोल गों कि सोल धार, कां हाट कां बजार’। यह पिथौरागढ़-अल्मोड़ा सीमा पर के बाशिंदों में प्रचलित लोकोक्ति है। हाट माने गंगोलीहाट और बाजार माने पिथौरागढ़। सड़कों के न होने के दौर में जो पैदल रास्ते थे उनमें ही एक महत्वपूर्ण रास्ता वर्तमान के अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ जिलों को जोड़ता है। यही रास्ता पुराने समय में भारत-नेपाल [...]
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लेखक : रोहित जोशी :: अंक: 23 || 14 जुलाई से 31 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 23, 2010 पर प्रकाशित
हैलो!…. नैनीताल समाचार और इसे पढ़ने वालो!…. हैप्पी हरेला…। तमाम एस. एम. एस. के जरिये ऐसे ही पहुँचनी हैं आपके फोनों में हरेले की शुभकामनाएँ तो मेरे पत्र में भी ऐसे ही सही। और फिर अब तो नैनीताल समाचार का इन्टरनेट संस्करण भी आ गया है। कुछ तो मॉडर्न यहाँ भी होना चाहिए। खैर…. अब [...]
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लेखक : रोहित जोशी :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 8, 2010 पर प्रकाशित
कुमाऊँ विश्वविद्यालय के सोबनसिंह जीना परिसर अल्मोड़ा में अध्यापन कर रहे डॉ. शेखर जोशी स्वयं की विकसित की हुई शैली ‘नेल पेण्टिंग’ में अपने अद्भुत् चित्रांकन के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं। यूँ तो उन्होंने चित्रकला की अन्य विधाओं पर भी काम किया है, लेकिन नेल पेंटिंग में नाखूनों द्वारा आकृति रचना और [...]
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लेखक : रोहित जोशी :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2010:: वर्ष :: 33 :May 27, 2010 पर प्रकाशित
उत्तराखण्ड का तकरीबन 45 फीसदी भाग वनों से ढँका पड़ा है। अगर उच्च हिमालय की वनस्पतिरहित, सदा हिमाच्छादित चोटियों को छोड़ दिया जाये, तो वन यहाँ के 66 फीसदी क्षेत्रफल को घेरे हैं। भारत में कुल क्षेत्रफल का 33 फीसदी वन क्षेत्र होना पर्याप्त माना गया है। इस दृष्टि से हम एक समृद्ध राज्य हैं। [...]
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लेखक : रोहित जोशी :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 21, 2010 पर प्रकाशित
कुछ समय पूर्व ‘नैनीताल समाचार’ ने उत्तराखण्ड की नदियों पर प्रस्तावित छोटे-बड़े बाँधों को काले धब्बे से दर्शा कर एक नक्शा प्रकाशित किया था। सैकड़ों बाँधों से लगभग पूरा नक्शा ही काला हो गया था। बाँधों से उभरी यह कालिख प्रतीकात्मक रूप में तथाकथित ऊर्जा प्रदेश के भविष्य को भी रेखांकित करती है। वर्तमान में [...]
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लेखक : रोहित जोशी :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 21, 2010 पर प्रकाशित
सरकार को मिलने वाले राजस्व की दुहाई दे-दे कर आबकारी विभाग गंगोलीहाट में शराब की दुकान खोलने को लेकर निरन्तर प्रयासरत है। विभाग के ये प्रयास तब से ही जारी हैं, जब से गंगोलीहाट में महिलाओं के नेतृत्व में 2006 में चले बड़े आंदोलन ने यहाँ शराब की दुकान को बन्द करवा दिया था। विभाग [...]
Posted in भ्रष्टाचार, विविध | Tagged anti alcohol, anti liquor, excise department, gangolihar, liquor, liquor mafia, liquor problem |
लेखक : रोहित जोशी :: अंक: 03 || 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 22, 2009 पर प्रकाशित
अपने व्यावसायिक जीवन में मुख्य रूप से आर्किटेक्ट रहे लखनऊ कला विद्यालय (वास्तुकला) के स्टूडेण्ट डी. एल. साह एक उम्दा चित्रकार भी हैं। रंगो की तीव्रता को छोड़कर उदासी के रंग अगर विनसेण्ट वॉन गॉग के कैनवासों को चढ़ा दिए जाएँ तो लैण्डस्केप के आकारों और ब्रश के स्ट्रोक्स से डी. एल. साह भी वॉन [...]
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लेखक : रोहित जोशी :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2008:: वर्ष :: 32 :August 15, 2008 पर प्रकाशित
पहाड़ों के लिए बरसात में भूस्खलन एक स्थायी त्रासदी बन गया है। उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में हमेशा की तरह ही इस बार भी बेतहाशा भूस्खलन हुआ है, जिससे जनजीवन अस्तव्यस्त है। विगत वर्ष धारचूला के बरम व इस वर्ष सूखीडांग में रोडवेज बस में मलवा आ जाने से हुए जानलेवा भूस्खलनों ने रोंगटे खड़े [...]
Posted in जनमवार अंक, विविध, विशेषांक | Tagged landslide, rain, river edition, transport problem, नदी अंक |
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