‘चिपको’ की याद ताजा हुई
22 जून को अल्मोड़ा में सम्पन्न हुआ कुमाऊँ विश्वविद्यालय का दशम दीक्षान्त समारोह एक तरह से ‘चिपको आन्दोलन’ को समर्पित रहा। समारोह की मुख्य अतिथि जहाँ प्रख्यात पर्यावरणविद् डॉ वंदना शिवा थीं, वहीं चंडी प्रसाद भट्ट को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। ध्यान रहे कि अस्सी के दशक में ‘चिपको’ आन्दोलन में [...]
महिलाएं एवं मीडिया विषय पर एक सार्थक गोष्ठी
श्रीदेव सुमन जयन्ती ‘‘जिस राज्य की नीति अन्याय, अत्याचार व स्वेच्छाचारित पर अवलंबित हो, उसके विरुद्ध विद्रोह करना प्रत्येक नागरिक का मूल कर्तव्य है। यही मैंने भी किया है और शरीर में दम रहते हुए मैं बराबर यही करता रहूँगा। माँ, बहिन, भाई व पत्नी के प्रेम पर देश प्रेम ने और घर-बार, बच्चों व [...]
जन आन्दोलनों पर माओवाद का ठप्पा लगाने का प्रयास
उत्तराखंड में बन रही जल विद्युत परियोजनाओं ने पर्यावरण को ही नहीं उत्तराखंड के आम जन जीवन को भी नारकीय बना दिया है। इसका लाभ सिर्फ राजनेता व ठेकेदारों को ही मिल रहा है। उत्तराखण्ड के आम आदमी के जीवन में खुशहाली तथा बड़े बाँधों का जबाव देने के लिये उत्तराखण्ड लोक वाहिनी व आजादी [...]
आतंक के बीच वह साहस तो अद्भुत था…. ‘
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा’ के शंकर गुहा नियोगी मजदूर, किसान और बुद्धिजीवी की एकता के प्रबल समर्थक थे। इसी कारण दल्ली-राजहरा का संघर्ष देश के विभिन्न क्षेत्रों के समर्थन से आगे बढ़ा। नियोगी इस लड़ाई में बलिदान हो गये, लेकिन देश में चल रहे बदलाव के आन्दोलन में उन्होंने हमेशा के लिये अपना स्थान बना लिया। [...]
ताउम्र आन्दोलनों की नींव के पत्थर बने रहे राजा बाबू
हम इस भ्रम में रहते हैं कि हम सदा जीवित रहेंगे। लेकिन इस सत्य को स्वीकार नहीं करते कि यह दुनिया एक धर्मशाला है। इस ‘सदा रहने’ के भ्रम में ही कुछ न कुछ करते हैं, मानो हमारा यहाँ स्थायी निवास हो। छल, प्रपंच करके भी धन अर्जित करते हैं। रत्ती-रत्ती धन और पद के [...]
मंत्री पुत्र का विवाह, उत्तराखंड विधान सभा में अवकाश
जनप्रतिनिधि जनहित के कार्य करें या नहीं, विधायी जिम्मेदारियाँ निभायें अथवा नहीं, यह अब महत्वपूर्ण नहीं रह गया है। लेकिन विवाह, मुंडन, नामकरण, जन्म-उत्सव व मृत्यु आदि अवसरों पर अपने खास लोगों के वहाँ जाना वे पहला कर्त्तव्य मानते हैं। उत्तराखंड क्रान्ति दल के पहले विधायक जसवन्त सिंह बिष्ट अपने राजनैतिक जीवन के प्रथम चरण [...]
नैन सिंह: वह उत्तराखंड के जनसंघर्षों की बुनियाद था
तो खस्टी (षष्ठीदत्त जोशी) के बाद 7 अक्टूबर को नैनसिंह भी चला गया……65 साल की उम्र में। जाहिर है कि नैनसिंह का जाना कोई बड़ी खबर नहीं हो सकती थी। वह तो उन लोगों में था, जिनके दम पर खबर बनाने वाले लोग बनते हैं…… नींव का पत्थर! तो उसके दम पर जो खबरों में [...]
मानसिकता बदल रही है
पंचायतों को लेकर लोगों की मानसिकता में बदलाव आ रहा है और सरकार की भी। लोग समझने लगे हैं कि चाहे ग्राम पंचायत हो अथवा नगरपालिकायें, उनको लापरवाही से नहीं लिया जा सकता। शायद वे इन्तजार भी कर रहे हैं कि अभी ये संस्थायें और ज्यादा शक्तिशाली होंगी। यह एक अच्छा लक्षण है। इस साल [...]

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