अपनों ने ही भुला दिया देवी दत्त शर्मा को
लालटेन के मन्द प्रकाश में चीड़ के ‘बगटों’ को वह चाकू से तराश रहा था। कुछ आकृतियाँ जमीन पर बिखरी थीं और कुछ उसके मानस पटल पर अंकित। वह कम से कम टुकड़ों से संसार की अधिकतम भाषाओं की लिपियों को सिखाने का सपना मन में संजोए था। था तो वह प्राइमरी पाठशाला का एक [...]
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