गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णुः, गुरूर्देवो महेश्वरः, गुरूः साक्षात्….
गुरूर्ब्रह्मा, गुरूर्विष्णुः, गुरूर्देवो महेश्वरः । गुरूः साक्षात्परं ब्रह्मं तस्मै श्री गुरुवै नमः ।। गुरु की महानता बखानता यह श्लोक मुझे बचपन के उन दिनों से याद है, जब मैं इसका अर्थ बिल्कुल भी नहीं जानता था। कुछ बड़ा होने पर जब जरा संस्कृत सीखी तो श्लोक का शब्दार्थ समझ में आया। मगर सच मानिये इसका [...]
……और मैंने एक सपना देखा ….
यह मेरा गाँव है। इसका नाम अब ‘इकचुलिया गाँव’ है। पहले कभी इस गाँव में तीस परिवार बसते थे, अब एक परिवार है। आप सोचते होंगे कि पलायन ने गाँव खाली कर दिया। आप इससे इतर सोच भी क्या सकते हैं ? पर हाँ, यहाँ पलायन जैसा कुछ नहीं हुआ, उलटे बाहर से आकर पाँच-छः [...]
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