विख्यात जनकवि बाबा नागार्जुन के 100वें जन्मदिवस ज्येष्ठ पूर्णिमा से ‘नागार्जुन शताब्दी वर्ष’ का शुभारम्भ किया गया है। इसी कड़ी में बाबा की प्रिय प्रवास-स्थली जयहरीखाल में लैन्सडाउन पुस्तकालय समिति के तत्वावधान में लैन्सडाउन में ‘नागार्जुन स्मृति व्याख्यानमाला’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि, सुप्रसिद्ध हिन्दी कवि वीरेन डंगवाल ने बाबा की कविताएँ तथा उनसे जुड़ी स्मृतियाँ उपस्थित जनसमूह के मध्य सुनायीं। उन्होंने पुस्तकालय के इस आयोजन को बड़ी उपलब्धि बताया, क्योंकि बाबा से जुड़ी स्मृतियों में लैन्सडाउन (जयहरीखाल) का विशेष नाम आता है। इसीलिये साहित्यकारों में इस स्थान के प्रति लगाव होना स्वाभाविक है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए अश्वनी कोटनाला ने कहा कि बाबा एक सरल कवि थे, लेकिन यह सरलता कितनी बीहड़ है इसका अंदाजा उन कविताओं से मिलता है, जहाँ उनकी निगाह बड़ी आसानी से ऐसे विषयों तक चली जाती है जो दूसरों की निगाह में नही आते। कार्यक्रम में प्रो. वाचस्पति की कमी विशेष रूप से दिखायी दी। शायद कम ही लोग जानते हैं कि बाबा नागार्जुन 80 के दशक में जनपद पौड़ी गढ़वाल के तहसील लैन्सडाउन के ब्लाक मुख्यालय जयहरीखाल में आते थे और प्रो. वाचस्पति के साथ रहते थे। कार्यक्रम में उपजिलाधिकारी आलोक कुमार पाण्डेय, पत्रकार कमल जोशी, दिवाकर भट्ट, त्रिनेत्र जोशी आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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