वन व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने अपने रुख को साफ करते हुए देहरादून में घोषणा की कि पर्यावरण संरक्षण के साथ ही विकास की गति को बनाये रखना भी जरूरी है। उन्होंने लोहारीनाग-पाला बिजली परियोजना जारी रखने का संकेत देते हुए कहा कि इस पर पहले ही 800 करोड़ रु. खर्च हो चुके हैं तथा 600 मेगावाट की इस परियोजना का 40 प्रतिशत काम पहले ही पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की जरूरतों को देखते हुए परियोजना पर रोक लगाई जानी चाहिए, परन्तु बिजली की जरूरत को देखते हुए इस पर विचार किया जाना चाहिए। मिशन ग्रीन इंडिया के लिए यहाँ पहुँचने पर संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि बाँधों का निर्माण करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि पर्यावरण की रक्षा करना। उन्होंने कहा कि हमें इन दोनों ही के बीच ठीक संतुलन बैठाना होगा।
उनसे पर्यावरण के अनेक पहलुओं के बारे में सवाल पूछे गए। पॉलीथीन पर पूर्ण प्रतिबंध के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसा करना व्यावहारिक नहीं होगा, परन्तु पर्वतीय क्षेत्र में ऐसा प्रतिबंध अवश्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बारे में फैसला राज्य सरकारों के क्षेत्राधिकार में है। उन्होंने कहा कि कूड़ा निस्तारण की पुख्ता व्यवस्था की जानी चाहिए।
उन्होंने वन विभाग द्वारा वनवासियों को सौर लाल्टेन देने के विचार की सराहना की। दूसरी तरफ बायो गैस संयंत्रों की स्थापना के विपरीत राय प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि तापमान में गिरावट के साथ ही ये काम करना बंद कर देते हैं, अतः खास तौर पर उत्तर भारत के इलाकों में ये छः महीनों तक बेकार पड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि देश में वन क्षेत्र तो नहीं बढ़ाया जा सकता, परन्तु जो भी जंगल हैं उनका ठीक से संरक्षण करना जरूरी है। वन अधिकार कानून के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार कानून तो बनाती है, परन्तु उन पर अमल करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। महिला पंचायत प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि ग्रीन मिशन को जीवन व संस्कृति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
























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