प्रमोद काण्डपाल
बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केन्द्र भोपाल (मध्य प्रदेश) ने 14 अप्रेल 2012 को भोपाल में आयोजित अपने वार्षिक समारोह में अल्मोड़ा से प्रकाशित बच्चों की पत्रिका ‘बाल प्रहरी’ को देश की सर्वश्रेष्ठ बाल पत्रिका का सम्मान दिया है। प्रकाशन के आठ वर्ष के भीतर यह उपलब्धि प्राप्त करना सामान्य बात नहीं है। ज्ञातव्य है भारत ज्ञान विज्ञान समिति से जुड़े साथियों ने सन् 2004 में इसे इसे हस्तलिखित रूप में शुरू किया था। केन्द्रीय हिंदी निदेशालय ने पत्रिका को गैर हिंदी भाषी राज्यों के स्कूलों के लिए स्वीकृत किया है तो उत्तराखंड के विद्यालयी शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों के लिए।
आज जहाँ बच्चों की पठन-पाठन की आदतें कम होती जा रही हैं, बच्चों के मन में वैज्ञानिक सोच जाग्रत करने, उन्हें साहित्यिक मंच प्रदान करने तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से उनको आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से बाल प्रहरी ने अपने प्रवेशांक से ही बच्चों की रचनाओं को स्थान दिया है। प्रत्येक अंक में लगभग 50 बच्चों की रचनाएँ प्रकाशित होती हैं। विभिन्न प्रतियोगिताओं तथा बालप्रहरी बाल क्लब आदि के माध्यम से प्रत्येक अंक में लगभग 100 बच्चे बालप्रहरी से सीधे जुड़े होते हैं। उत्तराखंड एवं देश के अन्य राज्यों में बच्चों की लेखन कार्यशाला आयोजित करके साहित्य की नई पौंध तैयार करने का कार्य भी किया जा रहा है। देश की कुछ प्रमुख व्यावसायिक पत्रिकाओं को छोड़ दिया जाए तो प्रसार की दृष्टि से भी बालप्रहरी पीछे नहीं है।
helo sir,
today i hav seen d website of bal prahari.first of all congrats as a winner of best patrika.realy u n ur team did fantastic job. n m happy to b part of your patrika.pay my regards to all.
for the first time, after knowing about its veb section, from the chief editor of balprahari, published from almora, i have gone through and felt so happy. i take an opportunity, as a life member of this esteemed magazine, to congrats brother uday kiraula and his team, who exert at their level best to get this magazine ( balprahari) fully ornamented.
-DR RAGHUNATH MISHR, ADVOCATE/ WRITER, KOTA