अजय कुमार मलिक ‘तड़प’
सितारगंज विधानसभा सीट पर भाजपा का टिकट किरन मंडल को मिलना बरसों से चले आ रहे आंदोलन का नतीजा है। उनकी पहल पर बंगाली कल्याण समिति के बैनर तले नागरिकता, अनुसूचित जाति का दर्जा दिये जाने आदि माँगों को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन हुए, जो आज तक जारी हैं। सन् 2000 में रुद्रपुर में किया गया प्रदर्शन आज भी इतिहास बना हुआ है। यहाँ पर कांग्रेस के सुरेश गंगवार और निखिल भारत समन्वय समिति से निष्कासित राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय मण्डल सपा की ओर से चुनावी मैदान में है। निखिल भारत उद्वास्तु समन्वय समिति बंगालियों का लगभग 18 प्रदेशों में व्याप्त राष्ट्रीय संगठन है। पिछले दिनों इन्हीं संगठनों के बैनर तले लगभग 18 प्रदेशों में रह रहे बंगाली विस्थापितों ने जंतर मंतर, दिल्ली में घरना प्रदर्शन किया। बंगाल विभाजन में भारत सरकार ने इन बंगालियों, जिनकी जनसंख्या सम्पूर्ण भारत में 6 करोड़ आँकी गयी है, विभिन्न प्रदेशों में नाममात्र जमीनें ही लीज पर दी हैं। उन पर मालिकाना भी हक नही दिया गया है। राजनैतिक दल उन्हें लगातार एक वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इधर गुरुचाँद मुक्ति मोर्चा के नाम से एक नया संगठन खड़ा हुआ है। गुरुचाँद ठाकुर को दलित उत्थान का पितामह कहा जा सकता है। इनके अनुगामी जोगेन्द्र नाथ के नेतृत्व में बाबा साहेब अम्बेडकर को बंगाल से चुनाव जिताकर संविधान में भेजा गया था। गुरुचाँद मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी सुनील हालदार सितारगंज क्षेत्र के चुनावी मैदान में हैं। उनका कहना है कि आज तक राष्ट्रीय पार्टियाँ हमें सिर्फ चुनावी कठपुतली ही बनाती रही हैं। गुरुचाँद मुक्ति मोर्चा दलितों के हित में कार्य करेगा।