गौला नदी, जो माफियाओं के लिए वरदान है, नैनीताल जिले के बिन्दुखत्ता क्षेत्र के निवासियों के लिए स्थायी शोक का कारण बन गयी है। नदी में प्रतिवर्ष आने वाले उफान से यहाँ के किसानों की खेती को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
बिन्दुखत्ता के रावतनगर, इन्द्रानगर, खुरीयाखत्ता, शीशम भुजिया और श्रीलंका टापू सहित दर्जनों गाँव गौला नदी के किनारे बसे हैं। राजनीतिक दलों के संरक्षण में होने वाले बेतहाशा खनन ने गौला को किसानों के लिए अभिशाप बना दिया है। नदी के पूर्वी दिशा में बसे जंगल को भी बाढ़ से खतरा है। ग्रामीणों की दो दशक पुरानी माँग को देखते हुए प्रशासन ने नदी के किनारे तटबन्ध बनाने का जिम्मा वन विभाग को सौंपा। पिछले 8 वर्षों से इन तटबन्धों का निर्माण किया जा रहा है लेकिन घटिया निर्माण के चलते यह एक साल भी गौला नदी के बहाव से मुकाबला नहीं कर पाते। 14 अक्टूबर 1994 को गौला नदी ने अचानक आई भीषण बाढ़ के साथ अपना मार्ग बदलकर सैकड़ों एकड़ भूमि को अपनी चपेट ले लिया था। बिन्दुखत्ता का एक हिस्सा बाढ़ से कट कर टापू जैसा बन गया। कई दिनों इसका सम्पर्क पूरे देश से कटा रहा। तब बी.बी.सी लन्दन ने इसे ‘श्रीलंका टापू’ का नाम दिया था। पीडि़तों को हैलीकॉप्टर से पन्तनगर में उतारा गया। दर्जनों खनन मजदूरों की जिन्दगी चली गई। तब शासन-प्रशासन एवं सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने जमकर घडि़याली आँसू बहाये लेकिन यहाँ के निवासियों की स्थिति आज भी नहीं सुधर पाई।
श्रीलंका टापू में निवास करने वाले अधिकांश परिवार पहाड़ों से यहाँ आकर बसे हैं। गौला में हर साल आने वाली बाढ़ से यहाँ अनेक समस्याओं का अम्बार लग जाता है। दो माह तक यह क्षेत्र बाहर से कट जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। लोगों को दैनिक उपयोग की जरूरी चीजें उपलब्ध नहीं हो पातीं। पिछले चुनाव में वर्तमान प्रत्याशियों ने बिन्दुखत्ता और श्रीलंका टापू को जोड़ने के लिए पुल बनाने का आश्वासन दिया था, जो अब तक नहीं बन पाया। इस बरसात गौला नदी ने फिर भयंकर तबाही मचायी और बिन्दुखत्ता क्षेत्र में 30 एकड़ भूमि गौला नदी में समा गयी। श्रीलंका टापू में दो घर, एक प्राइमरी स्कूल व दुग्ध डेरी का भवन भी गौला नदी में बह गया। इस बाढ़ में दो करोड़ का नुकसान हुआ। बरसात के अलावा यहाँ ग्रामीण खनन एवं शराब माफिया के आतंक दहशत में जीते हैं। श्रीलंका टापू एवं अन्य खत्तों में लोग मूलभूत सुविधाओं के अभाव में अमानवीय जीवन बिताने को मजबूर है। बिन्दुखत्ता को अब तक राजस्व गाँव का दर्जा तक हासिल नहीं है, जिसके चलते यहाँ के निवासी किसी सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाते।
i m live in bindukhatta and i m proud to be my village