बिनसर अभयारण्य
बिनसर वन्य जीव विहार प्रभावित गाँवों की एकजुटता के परिणाम दिखने लगे हैं। अब ग्रामीणों की माँगों पर कार्यवाही होती दिख रही है। समय-समय पर बैठकें करने से उनमें समझ और अपने अधिकारों-कर्तव्यों के प्रति सजगता बढ़ रही है।
21 जुलाई 2009 को अयारपानी स्थित बिनसर अभयारण्य के राजि कार्यालय में उत्तराखंड संसाधन पंचायत द्वारा आयोजित एक बैठक में संसाधन पंचायत के सदस्यों, पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, काश्तकारों तथा वन विभाग के अधिकारियों ने भागीदारी की। बैठक की अध्यक्षता तारा नगरकोटी तथा चंदन सिंह बिष्ट द्वारा की गई। संचालन करते हुए ईश्वरी दत्त जोशी ने कहा कि 19 अप्रेल 2009 को श्रीराम विद्या मंदिर, डोटियालगाँव में आयोजित की गई एक बैठक के उपरान्त कार्बेट नेशनल पार्क के निदेशक को ज्ञापन भेजा गया, जिसमें बाघ द्वारा मारे गए पालतू पशुओं का लम्बित मुआवजे का भुगतान करने, सुअरों के द्वारा की जा रही फसल क्षति का मुआवजा देने तथा सुअरों को मारने की अनुमति देने की माँग की गयी थी। ज्ञापन पर कार्यवाही करते हुए वन्य जीव प्रतिपालक द्वारा बजट प्राप्त होते ही मुआवजा देने का लिखित आश्वासन दिया गया। उन्होंने वन क्षेत्राधिकारी के स्टाफ को बन्दूक के साथ भेजकर सुअरों को भगाने की कार्यवाही के निर्देश दिये थे। इस कार्यवाही को नाकाफी मानते हुए संसाधन पंचायत ने पुनः 21 जून 2009 को बसौली में बैठक की और फिर वन क्षेत्राधिकारी से मुलाकात की। 21 जुलाई को बिनसर वन्य-जीव विहार के कार्यालय के सम्मुख धरना-प्रदर्शन किये जाने की चेतावनी को देखते हुए विभाग द्वारा 2 जुलाई को पशु हानि संबंधी अप्रेल 2007 तक के 2 लाख 50 हजार रूपये का लम्बित मुआवजा वितरित किया गया। साथ ही ग्रामीणों से बातचीत करने की इच्छा भी व्यक्त की गई।
बैठक में तेंदुओं द्वारा मारे गए पालतू पशुओं के मुआवजे संबंधी मामलों का भुगतान अविलम्ब करने, भविष्य में ऐसे मामलों का निपटारा एक वर्ष के भीतर कर दिये जाने, प्रभावित क्षेत्रों के सभी मामलों को अभ्यारण्य विभाग द्वारा दर्ज किए जाने, सुअरों द्वारा की जा रही फसल क्षति का मुआवजा देने, सुअरों को मारने की अनुमति देने, कृषि भूमि की घेराबंदी करने तथा बिनसर जंगल में ग्रामीणें के पुश्तैनी हक-हकूकों की स्थिति स्पष्ट कर उन्हें हक की लकड़ी उपलब्ध कराने की माँग की गई। पूर्व प्रधान राजेन्द्र सिंह ने कहा कि जंगली सुअरों द्वारा किये जा रहे नुकसान से ग्रामीणों के सम्मुख भुखमरी की नौबत आ गई है। सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण सिंह भाकुनी ने कहा कि सरकार सुअरों के लिये तो चिन्तित है, लेकिन आदमी के संरक्षण के लिए नहीं। भैंसोड़ी की ग्राम प्रधान गंगा पाण्डे, तारा नगरकोटी व अर्जुन सिंह ने सुअरों को मारने हेतु विभागीय कर्मचारी को शिकारी नियुक्त किये जाने की मांग की। हड़ौली के हरसिंह भाकुनी ने फसल सुरक्षा के लिए ठोस प्रयास की आवश्यकता बताई। राजेन्द्र जोशी ने मुआवजे की राशि को बढ़ाने की मांग की। बसौली के दर्बान सिंह ने फसल सुरक्षा हेतु सोलर फेंसिग का सुझाव दिया। बसौली की ग्राम प्रधान बसंती देवी ने सुअरों को भगाने के लिए गांव स्तर पर गांधी बंदूक उपलब्ध कराये जाने की मांग की।
प्रधान संगठन के अध्यक्ष चंदन सिंह ने पशु हानि संबंधी पुराने मामलों की स्थिति स्पष्ट करने की माँग की। गोविन्द सिंह चौहान ने सुअरों के द्वारा की जा रही फसल की क्षति का कारण उनके लिए जंगल में हो रही भोजन की कमी को मानते हुए चीड़ एवं अकेशिया के वनीकरण पर रोक लगाने की माँग की। संसाधन पंचायत कठधारा के अध्यक्ष पूरन सिंह ने बताया कि उनके गाँव के निकट बिनसर पहाड़ पिछले कई महिनों से टूट रहा है जिससे उनका मार्ग अवरुद्ध हो गया है। अभयारण्य क्षेत्र में स्थित होने के कारण अन्य विभाग मरम्मत करने से इंकार कर रहे हैं। कठधारा के ही त्रिलोक सिंह व हरीश जीना ने कहा कि बीच में अभयारण्य का क्षेत्र पड़ने के कारण उनके गाँव में बिजली नहीं पहुँच पा रही है।
वन्य-जीव प्रतिपालक उमेश चन्द्र तिवारी ने आश्वासन दिया कि पशु हानि के लम्बित मुआवजे हेतु 50 हजार रुपये इसी माह अवमुक्त किये जायेंगे। शेष लम्बित मामलों के निस्तारण के लिए प्रयास किए जायेंगे। ग्रामीणों द्वारा उठाये गये तमाम सवालों पर कॉर्बेट पार्क के सम्बन्धित अधिकारियों से चर्चा कर समाधान निकालने का भी उन्होंने आश्वासन दिया।