बीस सालों से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही उत्तराखण्ड की स्वयंसेवी संस्था ‘सिद्ध’ ने पिछले दिनों ‘इतिहास की समझ शिक्षक मार्गदर्शिका’ प्रकाशित की, जिसकी चर्चा देश भर में हुई। इस किताब को भी कुसुमा ट्रस्ट हैदराबाद के सहयोग से प्रकाशित किया गया है।
दरअसल जो हम बच्चों को पढ़ा रहे हैं, वह समाज और परिवेश से बिल्कुल कटा है। उसमें गुलामियत और अंग्रेजियत की बू है। जबकि शिक्षा का उद्देश्य मौलिक सोच तथा जानकारी और सूचना भर देने से इतर ज्ञान और अवधारणाओं की समझ विकसित करना होना चाहिये। ज्ञान रोजमर्रा की जिन्दगी का हिस्सा बन सके तथा व्यक्ति उसे अपने आचरण में ला सके, तभी शिक्षा की सार्थकता है। ‘इतिहास की समझ’ शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए इतिहास समझने का एक नया दृष्टिकोण खोलती है। राजाओं, महापुरुषों, सन्तों, क्रांतिकारियों तथा कुछ घटनाओं, आक्रमणों, युद्धों आदि से बच्चे इतिहास को अपने जीवन से जोड़ने में असमर्थ रहते हैं। वे इतिहास के प्रयोजन को नहीं समझ पाते।
किताब सबसे पहले बच्चे को परिवेशीय ज्ञान की ओर ले जाती है। दूसरे अनुच्छेद में मेरे परिवार का इतिहास के बारे में बातचीत की गई है, जिसमें परिवार सम्बन्धित जानकारी, पीढ़ियों की सूचना, परिवार में आए बदलाव आदि के बारे में जानकारी माँगी गई है। तीसरे अनुच्छेद में अपने गाँव के इतिहास के बारे में जानकारी दी गई है, जिसके अन्तर्गत गाँव के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक ढांचे के बारे में अलग-अलग प्रश्नों के जरिए गाँव का नाम, नक्शा, गांव में किस जाति के लोग बसे हैं, उनके क्या धन्धे व उनकी जनसंख्या क्या है, मुख्य घटना, लोक संस्कृति, परम्पराएँ, प्रथाएँ, लोक कथाएँ, गीत, मान्यताएँ इत्यादि के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी चाही है। वहीं गाँव के जंगल, पानी के संरक्षण, वनस्पति, बाजार व्यवस्था, न्याय व्यवस्था अन्य सुविधाओं का होना तथा उस पर विशद जानकारी हम ले सकते हैं तथा बच्चों को सरल ढंग से जटिलता की ओर ले जा सकते हैं। फिलहाल इतिहास में जो हमें पढ़ाया जा रहा है, वह बच्चे के भीतर नकारात्मक सोच पैदा कर रहा है। जब हम इतिहास को जीवन जगत से जोड़ते हैं तो वह उसे समझने का नया दृष्टिकोण पैदा करता है। ![]()
पुस्तक: इतिहास की समझ
लेखक: पवन कुमार गुप्ता
मूल्य: 50 रुपये
प्रकाशक: कुसुमा ट्रस्ट, हैदराबाद