लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2011:: वर्ष :: 35 :January 1, 2012 पर प्रकाशित
खुशी राम शर्मा सम्पूर्ण भारत से अलग जोनसार-बाबर व सिरमौर में दीपावली का त्यौहार मनाने का विशिष्ट तरीका है। यहाँ बाकी देश से एक माह बाद दीवाली मनाई जाती है। किंवदन्ती है कि अयोध्या यहाँ से बहुत दूर होने के कारण भगवान रामचन्द्र के राज्याभिषेक का समाचार यहाँ एक माह बाद पहुँचा। लेकिन यह तर्क [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 03 || 15 सितंबर से 30 सितंबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 2, 2011 पर प्रकाशित
लेखक: उत्तराखंडवासी, प्रस्तुति: ताराचन्द्र त्रिपाठी, सौजन्य: ब्रिटिश लाइब्रेरी, लन्दन (यह लेख सन् 1920 में डाँग श्रीनगर निवासी श्री गोविन्दप्रसाद घिल्डियाल, बी.ए. डिप्टी कलेक्टर, उन्नाव द्वारा लिखित और विश्वंभरदत्त चन्दोला द्वारा गढ़वाली प्रेस, देहरादून से प्रकाशित पुस्तक ’गढ़वाली राजपूतों की सैनिक सेवा’ के परिशिष्ट 2 के रूप में प्रकाशित है। लेख के अन्त में लेखक ने [...]
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लेखक : माया पांडे :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2011:: वर्ष :: 34 :February 22, 2011 पर प्रकाशित
(कुमाऊँ में प्रचलित पर्वों के बारे में हम पिछले कुछ अंकों से माया पाण्डे की अप्रकाशित पुस्तक से जानकारी दे रहे हैं। इसी क्रम में इस बार शिवरात्रि के बारे में जानकारी प्रस्तुत है। -संपादक) जीवात्मा का परमात्मा से सहयोग, पंच ज्ञानेन्द्रियाँ, पंचकर्मेन्द्रियाँ तथा मन, अहंकार, चित्त और बुद्धि इन चतुर्दश का समुचित निरोध ही [...]
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लेखक : माया पांडे :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 27, 2011 पर प्रकाशित
माघ मास 1 पैट अकसर 14 जनवरी को मकर संक्रान्ति मनायी जाती है। दान-पुण्य की महत्ता को मानने वाला आस्तिक पर्वतीय समाज पवित्र नदियों में स्नान कर ब्राह्मणों को दक्षिणा और नदी के किनारे बैठे भिक्षुकों को भीख देकर पुण्य अर्जित करता है। माघ मास में उर्द की खिचड़ी का विशेष महत्व है। संक्रान्ति की [...]
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लेखक : उदय किरौला :: अंक: 03 || 15 सितंबर से 30 सितंबर 2010:: वर्ष :: 34 :October 2, 2010 पर प्रकाशित
आश्विन के पहले गते को कुमाऊँ में मनाया जाने वाला खतडुवा भी पशुओं का त्यौहार है। इस दिन गाँव के सभी घरों में भांग की डंडी पर काँस (घास) व फूल आदि लगाये जाते हैं। सायं सभी घरों के लोग चिराग जलाकर भाँग की फूल व काँस लगी इस डंडी को गाय के गोठ (गोशाला) [...]
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लेखक : गणेश रावत :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 19, 2010 पर प्रकाशित
विडम्बना ही कहा जाएगा कि जिस राज्य का मुख्यमंत्री खुद को कवि, साहित्यकार और पत्रकार कहलाने में गौरवान्वित होता हो, उसी राज्य में कला, साहित्य व संस्कृति को संरक्षण देने का काम हाशिए पर है। इसका जीता-जागता सबूत प्रदेश में साहित्य, कला और संस्कृति परिषद का अब तक गठन न हो पाना है। 6 साल [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 10, 2010 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : राजेन्द्र गहतोड़ी इतिहास की जड़ें काली कुमाऊँ में गहराई तक फैली हुई हैं। यत्र-तत्र मौजूद पुरातात्विक अवशेष अतीत की गौरव गाथा का वर्णन करते हैं। जिला मुख्यालय से लेकर प्रत्येक दिशा में जनपद के अन्तिम छोर तक बारहवीं सदी से लेकर ई.पू. तक का पुरातत्व बिखरा पड़ा है, जो ऐतिहासिक अध्ययन न हो [...]
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लेखक : उदय किरौला :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 8, 2010 पर प्रकाशित
विभिन्न अंचलों के अपने-अपने लोकनृत्य होते हैं। कुमाऊँ का लोकनृत्य छोलिया नृत्य कहा जाता है। इस नृत्य को करने वालों को छोल्यार कहा जाता है। यह नृत्य प्रायः पुरुषों द्वारा किया जाता है। यह नृत्य यहाँ श्रृंगार व वीर रस दो रूपों में देखने को मिलता है। कुमाऊँ के पाली पछाऊँ में प्रचलित छोलिया नृत्य [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
शंभु ने आज होली मचाई। इत दल साज्यो शिव शंकर ने, उत दल गिरिजा लाई। रंग गुलाल चलें दोउ दल में, शोभा ललित बनाई-सखी छवि वरणि न जाई। शंभु ने आज होरी मचाई गिरिजा झपट चली सखियन ते शंकर सन्मुख आई। भर पिचकारी दृगन में मारी मुख से लख मुसकाई।। देख शिव रूप लुभाई शंभु [...]
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लेखक : राम सिंह :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
माधुर्य, प्रेम और सौन्दर्य का पर्व होली मानव और मानवेतर प्रकृति में बदलाव का नूतन संदेश लेकर आता है। वृक्षों, लताओं, बेलों में नव पल्लव, कोपलें, पुष्प और उन पर मँडराते भ्रमरों-तितलियों के झुण्ड प्रकृति को संगीतमय बना देते हैं। नीरस पतझड़ और काटने वाली वायु के झोंकों के स्थान पर प्रकृति का नव पल्लवों [...]
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