लोक और शास्त्र का अद्भुत समन्वय है होली
विकृत होते सांस्कृतिक परिवेश के बीच जब हम कुमाऊँ अंचल की होली परम्परा की ओर नजर दौड़ाते हैं, तो सुखद आश्चर्य होता है। एक विशुद्ध परम्परा की इस होली गायकी ने यहाँ के लोक जीवन में स्वाभाविक रूप से प्रवेश कर लिया और शास्त्रीयता की जटिलता और प्रारम्भिक ज्ञान के अभाव के बीच जिस तरह [...]
थरूवाटी होली
लाभरिया (शरीर) मेरो भीगे रे साँवरिया मेरो भीगे रे वो छोड़ो आवे मेघ या बाढ़ के आवे मेघ ऐसे किते बदलिया उमड़ी रे राजस्थान से आये महाराणा प्रताप के वशंज कहलाने, वाला, थारू समुदाय में होली पर्व का विशिष्ट स्थान है। उत्तराखंड के भाबर और तराई में बसे इस समुदाय में होली लगभग एक महीना [...]
होली दमित भावनाओं का रेचन है.. मगर संस्कृति की ठेकेदारी ?
बसंत पंचमी आ गयी थी। इस उपलक्ष्य में कवि सम्मेलन के बाद बौद्धिकों ने आर्थिक मंदी, ग्लोबल वार्मिग का मोर्चा खोल दिया था। एक कविता पर अच्छी चर्चा हुई थी, जिसमें कहा गया था कि चेहरे पीले हो गये हैं, रुमाल पीले हों न हों। एक किसान कवि कह रहे थे, अरे साहब कैसा बसंत, [...]
उत्तरायणी मेला: इस बार मौसम भी रूठा रहा
इस बार बागेश्वर के सरकारी उत्तरायणी मेले के आयोजन को लेकर शुरूआत में प्रशासन असमंजस में फँसा रहा। अन्ततः जैसे- तैसे में ‘मेला समिति’ का गठन हुआ और शासन से दस लाख रुपये आने की भनक पड़ी तो वर्ष भर सोयी रहने वाली नगरपालिका परिषद् भी सक्रिय हो गयी। गली, मुहल्ले, सड़कें, नालियाँ साफ होने [...]
मरोज त्यौहार: यहाँ माघ में भी मांस खाया जाता है
प्रस्तुति : कमलेश ‘कुँवर’ यमुना घाटी के जौनसार भाबर, जौनपुर व रवाँई क्षेत्र में मनाये जाने वाला मरोज या आघ त्यौहार मकर संक्रान्ति से प्रारम्भ होकर पूरे माघ महीने तक चलता है। यहाँ मकर संक्रांति के अगले दिन क्षेत्र के प्रत्येक घर में बकरा काटा जाता है तथा उसके माँस को विभिन्न टुकड़ों में काटकर [...]
जीव जगत से बच्चों का अपनापा जोड़ने का पर्व है घुघुतिया
प्रस्तुति : मोहित सनवाल सांस्कृतिक रूप से बेहद समृद्ध उत्तराखंड के कुमाऊँ अंचल में संक्रान्तियों का विशेष महत्व है। यहाँ गते के अनुसार हर माह के प्रारम्भ को संक्रांत कहा जाता है। लगभग हर संक्रांत को कोई न कोई त्यौहार मनाया जाता है, जैसे चैत संक्रांत में फुलदेई, वैशाख में बिखौती संक्रांत, श्रावण में हरेला, [...]
चौपता का कौथिग
प्रस्तुति : कमलेश कुंवर ग्राम पंचायत चौपता विकास क्षेत्र नारायणबगड़, पट्टी कड़ाकोट के अंतर्गत 154.08 हेक्टेअर क्षेत्र में स्थित है। यहाँ मार्गशीर्ष माह में होने वाले कौथिग का विशेष महत्व है। इस कौथिग में माँ दुर्गा समेत अन्य देवी- देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। मार्गशीर्ष का शुभारंभ होते ही यहाँ गाँव-गाँव में खुशी की [...]
अभी जीवन्त और आकर्षक है लोक संगीत की सुर-लहरी
लक्ष्मी नौटियाल बदलते वक्त में आय का साधन भी बन रही हैं लोककलायें उत्तराखंड के लोक जीवन की विशिष्ट ताल और लय को यहाँ के लोकगीत व लोकनृत्य आसानी से व्यक्त कर देते हैं। ये सिर्फ मनोरंजन भर नहीं होते, बल्कि लोकजीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों से कुछ सीखने की प्रेरणा भी देते हैं। वैश्वीकरण के [...]
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