अभी तो खड़िया से आँखें चौधियायी हैं
प्रस्तुति : पंकज कुमार कांडपाल काण्डा पड़ाव एक छोटी सी बाजार है, जहाँ पर राशन-पानी से लेकर बर्तन, सब्जियाँ, टी.वी. सेट, कैमरा, फोटो स्टूडियो, दवाइयाँ इत्यादि उपलब्ध हो जाती हैं। इस क्षेत्र के कई गाँवों में से एक गांव है ‘बजीना’। काण्डा पड़ाव से इस गाँव के आधे रास्ते तक मोटर सड़क पहुँच चुकी है। [...]
यह तो नजरिया बदलने की शुरूआत है
नैनीताल स्वच्छता दिवस: 18 सितम्बर 2007 ‘‘ऐसी की तैसी हो गई, स्वच्छता दिवस की!’’ हमारे दोस्त ने झल्लाते हुए कहा। उनका गुस्सा वाजिब था। कई हफ्तों की मेहनत उन्होंने भी की थी, नैनीताल नगर को साफ-सुथरा बनाने के लिये। ऑक्सीकरण किये जाने के परिणामस्वरूप झील में बी-कार्प मछलियों के लगातार मरने से फैल रही दुर्गन्ध [...]
आखिर क्यों आक्रामक हो उठे हैं जानवर
बहुत तेजी से बढ़ती जंगली सुअरों की संख्या उत्तराखंड के पहाड़ों में खेती को कुछ सालों से भयंकर नुकसान पहुँचा रही है। उनका आतंक इतना हो गया है कि राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने अभी हाल में उनको, खास तौर पर मादाओं को, मारने की आज्ञा दे दी है। उस आज्ञा के खुलासे की [...]
केदारघाटी में घुस आये शराब के तस्कर
आबकारी विभाग से सरकार को राजस्व के रूप में जितना पैसा मिलता है, उतना शायद ही कहीं और से मिलता हो। मगर जहाँ एक ओर शराब की बोतलों पर कीमत चस्पाँ कर लोग कुछ राहत ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर तयशुदा रेट से अधिक कीमत वसूल कर शराब के कारोबारी अधिक पैसा बटोर रहे [...]
किलकारी से पर्यावरण चेतना
प्रस्तुति : हरीश मैखुरी चिपको आंदोलन की भूमि में अब ‘किलकारी आंदोलन’ चलाया जा रहा है। इसके तहत बच्चों के जन्म दिवस, नामकरण, अन्नप्राशन एवं मुंडन संस्कारों पर माता-पिता व संबंधियों द्वारा वृक्ष रोपित किये जाते हैं तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया जाता है। ‘किलकारी’ एक भावपूर्ण शब्द है और इस अभियान का उद्देश्य [...]
आपकी टिप्पणीयाँ