लेखक : दिनेश पंत :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 28, 2011 पर प्रकाशित
चीड़ की पत्तियाँ, जो पिरूल के नाम से जानी जाती हैं, जंगलों में लगने वाली आग का सबसे बड़ा कारण हैं। लेकिन यही पिरूल, यानी ‘पाइनवेस्ट रौक्स बरगाई’ या ‘पाइन नीडल’ भी कहा जाता है, अब आजीविका का जरिया बन रहा है। उत्तराखंड सरकार द्वारा चलाई गई ग्राम्या परियोजना में पिरूल, जिसका उपयोग पहले जानवरों [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 26, 2011 पर प्रकाशित
ईश्वर जोशी उत्तराखण्ड संसाधन पंचायत, लोक प्रबंध विकास संस्था तथा वन पंचायत सरपंच संगठन ताकुला के संयुक्त तत्वावधान में बिनसर वन्य जीव विहार से प्रभावित गाँवों की समस्याओं को लेकर एक बैठक 24 दिसम्बर 2010 को अयारपानी स्थित बिनसर अभयारण्य के राजि कार्यालय में संपन्न हुयी। बैठक में आयोजक संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा भारत [...]
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लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 25, 2011 पर प्रकाशित
अस्कोट और निकटवर्ती धारचुला-मुनस्यारी विकास हेतु छटपटा रहे हैं। प्राकृतिक आपदा से यहाँ का जनजीवन त्रस्त है। पुनर्वास की नीति स्पष्ट न होने से सरकार की इस गंभीर समस्या में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्हें मालूम है कि दैवीय आपदा पर्वतीय भूभाग में आती रहती है। उनके मकबरे को कोई खतरा नहीं है। बस कुदाल [...]
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लेखक : चंडी प्रसाद भट्ट :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 10, 2011 पर प्रकाशित
चंडी प्रसाद भट्ट सितंबर के तीसरे सप्ताह भर की अखंड बारिश ने पूरे उत्तराखंड को जाम करके रख दिया था। उसने सोर-पिथौरागढ़ से लेकर रामा-सिनाई, बंगाण तथा बद्रीनाथ से हरिद्वार, कपकोट से नैनीताल तक के बीच के क्षेत्र को झिंझोड़ कर रख दिया। लगभग दो सौ लोग तथा नौ सौ पशु मारे गये। एक हजार [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2010:: वर्ष :: 34 :December 13, 2010 पर प्रकाशित
त्रिलोकमणि पाठक जंगली सुअरों द्वारा कृषि-बागवानी को तहस-नहस करने की घटनायें पहाड़ में अब आम हैं। कभी-कभार सुअरों द्वारा लोगों को जान से मारने अथवा घायल करने के समाचार भी मिलते हैं। ये घटनायें जंगलों से घिरे उन गाँवों में होती हैं, जहाँ ये सुअर झाड़ियों में छुपे रहते हैं। रात होते ही वे फसल, [...]
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लेखक : जगमोहन रौतेला :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2010:: वर्ष :: 34 :December 3, 2010 पर प्रकाशित
कर्ज में डूबे किसानों की आत्महत्या की खबरें अब तक विदर्भ और आन्ध्र प्रदेश आदि राज्यों से सुनते थे। परन्तु पिछले दिनों पौड़ी और पिथौरागढ़ से आई खबरों ने पहाड़ी किसानों की दयनीय आर्थिक स्थिति की ओर ध्यान खींचा है। यदि इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो यहाँ भी किसानों की आत्महत्यायें [...]
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लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2010:: वर्ष :: 33 :August 18, 2010 पर प्रकाशित
‘‘भारत कृषि प्रधान देश है। यहाँ की 70 प्रतिशत जनसंख्या खेती पर आश्रित है,’’ यह वाक्य हम कक्षा दो से पढ़ते आये हैं। लेकिन उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद भी जनता के खेवनहारों ने कृषि की इस अमूल्य निधि की तरफ आँख उठाकर देखने की जरूरत नहीं समझी। जिस प्रकार पहाड़ों की सोना उगलने वाली [...]
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लेखक : राधा बहन :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 30, 2010 पर प्रकाशित
गर्मियों में मन को अत्यन्त व्यथित करने वाला एक दृश्य उत्तराखण्ड हिमालय में चारों ओर दिखाई देता है। वह है, वनों को निर्दयतापूर्वक नष्ट करती हुई वनाग्नि की धधकती लाल लपलपाती लपटें और उनसे उठते धुएँ के गुबार। यहाँ की खूबसूरत वादियाँ मानो कार्बन डाइ ऑक्साइड के गैस चैम्बर्स बन जाती हैं। पर मानव का [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 29, 2010 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : हरीश फुलारा बढ़ते प्रदूषण एवं उससे मानव जीवन पर पड़ रहे कुप्रभाव को कम करने हेतु भारत सरकार द्वारा वर्ष 1980 में वन अधिनियम लागू किया गया। इसके अन्तर्गत वन भूमि पर गैर वानिकी कार्य बिना भारत सरकार की पूर्वानुमति के नहीं किये जा सकते। नीति निर्धारकों द्वारा इसका दुरुपयोग किये जाने के [...]
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लेखक : गजेन्द्र पाठक :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 9, 2010 पर प्रकाशित
पेयजल, जैव विविधता तथा पर्यावरण के लिये महत्वपूर्ण स्याहीदेवी शीतलाखेत के 1100 हैक्टेयर क्षेत्रफल में फैले आरक्षित वन को बचाने के लिये चलाये जा रहे ‘जंगल बचाओ, पानी बचाओ’ अभियान के 7 वर्ष पूरा होने पर शीतलाखेत में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। स्याही देवी क्षेत्रीय विकास मंच द्वारा आयोजित इस बैठक में मुख्य [...]
Posted in जंगल, जल, विविध | Tagged forest, mano tiwari, pradeep tamta, save forest, save water, water crisis |
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